नई दिल्ली। 4:2:1:1 फॉर्मूले के तहत बिहार से कुल 8 मंत्रियों को नरेंद्र मोदी 3.0 सरकार में शपथ ली। एक तो जातीय तुष्टिकरण का संतुलन नहीं दिख रहा है, दूसरी ओर जेडीयू से सिर्फ दो मंत्री का शपथ लेना भी चौंकाने वाला है। खासकर तब जब चार सांसदों पर एक मंत्री बनाए जाने के सूत्र के साथ 3:3:1:1 की चर्चा थी।

जनता दल यू की सूत्रों की माने तो नीतीश कुमार की तरफ से लवली आनंद को रेल मंत्री बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इसके पीछे आनंद मोहन को लेकर फिर कोई पेंच फंसने की बात कही जा रही है। शायद यह पहली बार हो रहा है जब केंद्रीय मंत्रिमंडल में राजपूत जाति से कोई मंत्री नहीं बना। वह भी तब जब एनडीए ने सबसे ज्यादा उम्मीदवार राजपूत जाति से दिए थे। बीजेपी ने आरके सिंह, जनार्दन सिग्रीवाल, राधामोहन सिंह, सुशील सिंह, राजीव प्रताप रूडी, जेडीयू से लवली आनंद और लोजपा से वीणा देवी को चुनावी समर में उतारा। इनमें आरके सिंह और सुशील सिंह केवल चुनाव हारे हैं।

हालांकि जिन दो मंत्रियों ने शपथ ली उनका सामाजिक समीकरण के दायरे में देखें तो स्पष्ट है कि एक अगड़ा और एक अति पिछड़ा का समीकरण बनाया गया। लव कुश समीकरण के लिहाज से चर्चा यह थी कि कि या तो नालंदा लोकसभा से चौथी बार सांसद बने कौशलेंद्र कुमार को मंत्री बनाया जायेगा या फिर वाल्मीकीनगर से दूसरी बार सांसद बने सुनील कुशवाहा को बनाया जायेगा। पर इस दो के फॉमूर्ले ने जेडीयू के सामाजिक समीकरण को गड़बड़ा दिया।

2019 में भी एक और दो मंत्री की पेंच में जेडीयू काफी दिनों तक नमो मंत्रिमंडल से बाहर रहा। तब मसला जेडीयू के आरसीपी सिंह और ललन सिंह को मंत्री बनाने की जिद्द पर अड़े रहे। और नमो एक को केंद्रीय मंत्री बनाना चाहते थे। ये तो अंत में आरसीपी सिंह मंत्री तब बने जब जेडीयू के अध्यक्ष रहने के नाते खुद ही निर्णय किया और खुद ही मंत्री बन गए।

बिहार बीजेपी की बात करें तो चार मंत्रियों के शपथ लेने के बाद भी बीजेपी का जातीय समीकरण लीक से हटकर है। चार में दो सवर्ण, एक यादव और एक निषाद। दो सवर्ण और दो पिछड़ा जाति से। सवर्ण में एक भूमिहार और एक ब्राह्मण को मंत्री बनाया गया और पिछड़ा से एक यादव और एक निषाद। बीजेपी से भी किसी राजपूत को मंत्री नहीं बनाया गया। इतिहास गवाह है कि कभी राजीव प्रताप रूडी कभी राधामोहन सिंह तो कभी आरके सिंह मंत्री बनते रहे हैं।

राजभूषण निषाद को मंत्री बनाने के पीछे कारण यह रहा होगा कि उन्होंने न केवल वीआईपी को कमजोर किया बल्कि खुद भी अच्छे मतों के अंतर से जीते। उत्तर बिहार में निषाद मतदाताओं को साधने हेतु इन्हें मंत्री बनाया गया है। ऐसा इसलिए कि इन्हें वीआईपी के अध्यक्ष मुकेश सहनी और कांग्रेस के अजय निषाद के विरुद्ध मजबूती से उतरना है। निषाद मत उत्तर बिहार के कई विधानसभा को प्रभावित करते हैं।

भूमिहार से गिरिराज सिंह और ब्राह्मण से सतीश चंद्र दुबे को मंत्री बनाया गया है। इन दोनों को बनाने के पीछे बीजेपी के कोर वोटर भूमिहार और ब्राह्मण को मजबूती बॉन्डिंग के लिए दिया होगा। गिरिराज सिंह तो पहले भी मंत्री रहे हैं। पर सतीश चंद्र दुबे का नाम चौंकाता है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को देखते सतीश चंद्र दुबे को मंत्री बनाया गया है ताकि उत्तर बिहार में मजबूती के साथ ब्राह्मण मतों पर पकड़ बना सकें।

बीजेपी के राज्यसभा सांसद सतीशचन्द्र दुबे वाल्मीकि नगर लोकसभा क्षेत्र से 2014 से लेकर 2019 तक लोकसभा सदस्य रह चुके हैं। 2019 में टिकट कटने के बाद बीजेपी आलाकमान ने उन्हें राज्यसभा में भेजा था। सांसद बनने से पहले सतीश चंद दुबे चनपटिया और नरकटियागंज से विधायक भी रह चुके हैं।

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