
पटना। पत्रकार नगर थाना क्षेत्र के जोगीपुर में पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश किया है। यहां किराए के एक फ्लैट में प्रधानमंत्री मुद्रा लोन और अन्य सरकारी स्कीमों के नाम पर फर्जी कॉल सेंटर चलाया जा रहा था। पुलिस की संयुक्त टीम ने छापामारी कर मौके से एक युवती समेत तीन शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से छह लाख आठ हजार 650 रुपये कैश और भारी संख्या में डिजिटल उपकरण बरामद हुए हैं। इस पूरे खेल का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इस गैंग का मास्टरमाइंड कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि कॉलज में पढ़ने वाला एक छात्र है, जिसने अपनी ही प्रेमिका को इस कॉल धंधे में उतार दिया था।



कॉलर गर्ल बनाकर देश के विभिन्न राज्यों से लाखों रुपये की ठगी की। पकड़े गए आरोपितों में नवादा के वारिसलिगंज थाना क्षेत्र के कुंभी गांव निवासी मुख्य सरगना अक्षय कुमार (22 वर्ष), गयाजी जिले के टेकारी थाना क्षेत्र के भवनपुर निवासी उसका दोस्त शिवम कुमार (22 वर्ष) और अक्षय की प्रेमिका पटना के दीघा निवासी रिमझिम कुमारी (20 वर्ष) शामिल हैं।
अक्षय और रिमझिम एक ही कॉलज में साथ पढ़ते थे, जहां दोनों के बीच प्यार हो गया। अक्षय पहले से ही साइबर फ्रॉड के जरिए मोटी रकम कमा रहा था। अपने इस अवैध कारोबार को और बढ़ाने के लिए उसे एक महिला कॉलर की जरूरत थी, जिसकी आवाज पर लोग आसानी से भरोसा कर सकें।
इसके लिए अक्षय ने अपनी ही गर्लफ्रेंड रिमझिम को चुना और उसे साइबर ठगी की पूरी प्रक्रिया की ट्रेनिंग दी। बाद में अक्षय ने अपने दोस्त शिवम को भी इस काम के लिए तैयार किया और उसे भी ठगी के गुर सिखाए।
गिरोह ने ठगी के लिए बाकायदा एक संगठित सिस्टम बना रखा था, जिसमें सबका काम बंटा हुआ था। मास्टरमाइंड अक्षय और उसका दोस्त शिवम फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री मुद्रा लोन और सस्ते ब्याज पर ऋण देने के फर्जी विज्ञापन पोस्ट करते थे। जब देश के अलग-अलग राज्यों के जरूरतमंद लोग इन विज्ञापनों को देखकर लोन के लिए आवेदन करते, तो यह गैंग उनका डेटा डाउनलोड कर लेता था। इसके बाद काम शुरू होता था प्रेमिका रिमझिम का, जो कॉलर गर्ल बनकर पीड़ितों को अपनी मीठी बातों और भारी प्रलोभन के जाल में फंसाती थी।
जैसे ही कोई पीड़ित लोन लेने के लिए तैयार होता, यह गिरोह उसे झांसा देने के लिए एक फर्जी लोन अप्रूवल लेटर बनाकर भेज देता था। इसके बाद जीएसटी, अप्रूवल फीस और प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर क्यूआर कोड या यूपीआई के जरिए 500 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक ऐंठ लिए जाते थे। पैसे ट्रांसफर होते ही रिमझिम उस पीड़ित का नंबर ब्लॉक लिस्ट में डाल देती थी। पिछले एक साल से चल रहे इस फर्जी कॉल सेंटर के खिलाफ बिहार के साथ-साथ झारखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में भी मामले दर्ज हैं।
बिना कागजात के 3000 रुपये में मिलते थे सिम
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले सिम कार्ड अगमकुआं थाना क्षेत्र के भूतनाथ (कांटी फैक्ट्री के पास) स्थित एक दुकान से खरीदे जाते थे। वह दुकानदार बिना किसी वैध दस्तावेज के महज 2500 से 3000 रुपये में इन्हें सिम कार्ड उपलब्ध करा देता था।
पुलिस अब उस दुकान मालिक की गिरफ्तारी के लिए छापामारी कर रही है। पुलिस ने मौके से 14 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, एक टैबलेट, 15 एटीएम कार्ड, पांच चेकबुक, चार पासबुक, तीन नोटबुक, सात सिम कार्ड और 6,08,650 रुपये नकद जब्त किए हैं। इस गिरोह में दो अन्य स्थानीय अपराधियों की संलिप्तता भी सामने आई है जो फिलहाल फरार हैं।

