
पटना। कांग्रेस अक्सर अपना बना बनाया खेल बिगाड़ लेती है। चुनाव आयोग और रकफ मुद्दे पर दबाव झेल रही भाजपा को मल्लिकार्जुन खरगे ने संजीवनी दे दी। पटना में खरगे का बयान मोदी का बाप भी जाएगा’ कांग्रेस के सारे किये धरे पर पानी फेर गया। जो भाजपा अभी तक बचाव की मुद्रा में थी, वह अचानक आक्रामक हो गयी है। कांग्रेस ने बेवजह भाजपा को एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा दे दिया। बिहार राजनीतिक रूप से जितना जागरूक है उतना ही संवेदनशील भी। यहां से निकली गूंज दूर तक असर करती है।
2025 में मां के प्रति अपशब्द ने बदल दिया था चुनावी सीन : 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के एक नेता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मां के बारे में अभद्र टिप्पणी की थी। नतीजे निकले तो कांग्रेस की मिट्टीपलीद हो गयी और सिर्फ 6 सीटें मिली। अब खरगे बिहार आये तो नरेन्द्र मोदी के पिता तक पहुंच गये। खरगे की ये बयानबाजी अब उत्तर प्रदेश चुनाव में गुल खिला सकती है। नरेन्द्र मोदी की मां के खिलाफ टिप्पणी के कारण ही बिहार में राहुल गांधी का वोट चोरी वाला मुद्दा मार खा गया था। अब उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों के चुनाव में ‘पिता’ के खिलाफ टिप्पणी से मुख्य चुनाव आयुक्त का मुद्दा भी मार का सकता है।
लीड मैच हार जाती है कांग्रेस : कांग्रेस लीड लेकर मैच हारती रही है। फिर भी वह अपने खेल में कोई को सुधार नहीं पायी। विरोध के नाम कांग्रेस की ओछी और मर्यादा विहीन बयानबाजी से लगातार नुकसान होते रहा है। फिर भी यह सिलसिला रुक नहीं रहा। 2007 में गुजरात चुनाव के दौरान सोनिया गांधी ने नरेन्द्र मोदी को ‘मौत का सौदागर कहा था। नरेन्द्र मोदी ने इस बयान को गुजरात के गौरव से जोड़ दिया और प्रचंड बहुमत से चुनाव जीत लिया था। तब से लेकर कांग्रेस यही गलती दोहरा रही है।
2014 में कांग्रेस के निजी हमलों से मजबूत हुए थे मोदी :2014 में कांग्रेस की इसी गलती के कारण नरेन्द्र मोदी ने जनता की सहानुभूति अर्जित कर बहुमत प्राप्त कर लिया था। उस समय नरेन्द्र मोदी राष्ट्रीय राजनीति में नये थे और उनका भविष्य अनिश्चित था। हार भी सकते थे, जीत भी सकते थे। लेकिन कांग्रेस ने खुद उनकी राह आसान कर दी थी। 2014 के चुनाव से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने कहा था, नरेन्द्र मोदी कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। हां, वे चायवाला हैं तो कांग्रेस अधिवेशन आ कर चाय बेच सकते हैं। अय्यर की यह अपमानजनक टिप्पणी नरेन्द्र मोदी के लिए फायदेमंद साबित हुई। सहानुभूति में जनता ने भरपूर वोट से नवाजा।

