
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद जोरदार रिकवरी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ बंद हुए। बाजार में आई तेजी के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 5 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 456 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। शुक्रवार को यह लगभग 451 लाख करोड़ रुपये था।
कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 482.92 अंक यानी 0.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,606.75 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 153.20 अंक यानी 0.68 प्रतिशत चढ़कर 22,675 अंक पर पहुंच गया।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी
बाजार में व्यापक स्तर पर खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1.38 प्रतिशत की बढ़त के साथ 17,985 अंक पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1.19 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 56,465.40 अंक पर पहुंच गया।
सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी मेटल में 2.21 प्रतिशत की सबसे ज्यादा तेजी रही। इसके अलावा निफ्टी हेल्थकेयर 1.77 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा 1.76 प्रतिशत चढ़कर प्रमुख बढ़त वाले सूचकांकों में शामिल रहे। निफ्टी कमोडिटीज, एनर्जी, ऑयल एंड गैस, इन्फ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस, पीएसई, मैन्युफैक्चरिंग और आईटी सूचकांकों में भी मजबूती दर्ज की गई।
हालांकि, निफ्टी मीडिया में 0.34 प्रतिशत और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 0.21 प्रतिशत की गिरावट रही।
इन शेयरों में रही खरीदारी
सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में अदाणी पोर्ट्स, इटरनल, कोटक महिंद्रा बैंक, ट्रेंट, टाटा स्टील, भारती एयरटेल, इंडिगो, आईटीसी, बजाज फिनसर्व, अल्ट्राटेक सीमेंट, बीईएल, इन्फोसिस, एक्सिस बैंक, एलएंडटी, एशियन पेंट्स, एनटीपीसी, टाइटन, आईसीआईसीआई बैंक, टेक महिंद्रा, टीसीएस, एसबीआई और एमएंडएम बढ़त के साथ बंद हुए।
दूसरी ओर, बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी, एचसीएल टेक और पावर ग्रिड के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। हिंदुस्तान यूनिलीवर और सन फार्मा के शेयर लगभग स्थिर रहे।
किन वजहों से लौटी बाजार में तेजी?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले कारोबारी सत्रों में आई गिरावट के बाद निवेशकों ने चुनिंदा शेयरों में खरीदारी की। धातु, बिजली और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के शेयरों में मजबूती ने बाजार को सहारा दिया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निचले स्तरों पर खरीदारी देखने को मिली।
हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता अब भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व, यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ जापान के आगामी नीतिगत फैसलों से पहले निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती तिमाही नतीजों से बिजली उत्पादन, धातु और रिफाइनिंग जैसे क्षेत्रों में बेहतर मुनाफे के संकेत मिल रहे हैं। लेकिन ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी और ब्याज दरों से जुड़ी चुनौतियां आने वाली तिमाहियों में कंपनियों की वृद्धि को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में बाजार में आगे भी निवेशकों की नजर कंपनियों के नतीजों, वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी रहेगी।

