पटना। सरकारी ठेकों में कथित भ्रष्टाचार के मामले में ठेकेदार रिशुश्री पर शिकंजा कसने के बाद अब जांच की आंच सरकार के करीब एक दर्जन अधिकारियों और कर्मियों तक पहुंच सकती है। जांच एजेंसियों को रिशुश्री के ठिकानों पर हुई छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, वित्तीय लेन-देन से जुड़े साक्ष्य, मोबाइल चैट और काल डिटेल्स मिले हैं। इन्हीं के आधार पर रिशुश्री से जुड़े अधिकारियों, सहयोगियों और कथित लाभार्थियों की सूची तैयार की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इन संदिग्धों की भूमिका की पड़ताल के लिए उन्हें नोटिस जारी कर पूछताछ हो सकती है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि सरकारी ठेकों के आवंटन, भुगतान और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में किस स्तर पर अनियमितताएं हुईं और किसे इसका और कितना लाभ मिला।

पिछले वर्ष भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी रिशुश्री के ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस दौरान रिशुश्री और बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी मुमुक्षु कुमार चौधरी के बयान दर्ज किए गए थे। पूछताछ में दोनों ने कथित तौर पर ऐसे कई अधिकारियों के नाम बताए थे, जिन पर सरकारी ठेकों में रिशुश्री और उससे जुड़ी कंपनियों को लाभ पहुंचाने तथा प्रक्रियाओं को प्रभावित करने के आरोप हैं।

सूत्रों की माने तो इस मामले की स्वतंत्र जांच की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। ईडी की जांच में सामने आए तथ्यों के सत्यापन और प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिए किसी राज्य स्तरीय जांच एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। यदि ऐसा होता है तो संबंधित विभागों में ठेकों के आवंटन, भुगतान प्रक्रिया और परियोजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े दस्तावेजों की भी गहन समीक्षा होगी।

माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे तथा प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

कानूनी राय ले रही सरकार : सरकारी ठेकों में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामले में निलंबित किए गए आईएएस अधिकारी अभिलाषा शर्मा और योगेश कुमार सागर की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। राज्य सरकार दोनों अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है। हालांकि, अंतिम निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, सरकार जांच में सामने आए दस्तावेजों और अन्य प्रमाणों का परीक्षण करा रही है। प्राथमिकी से पहले विधि विभाग और महाधिवक्ता की राय ली जाएगी। सरकार यह भी आकलन कर रही है कि उपलब्ध साक्ष्य आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए पर्याप्त हैं या नहीं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की जा सकती है। सेवा नियमों के उल्लंघन, पद के दुरुपयोग और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों की अलग से जांच होगी। संबंधित विभागों से रिपोर्ट और कानूनी परामर्श जुटाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि सरकारी ठेकों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद दोनों अधिकारियों को निलंबित किया गया था। अब एफआइआर और विभागीय कार्रवाई की संभावनाओं ने मामले को नया मोड़ दे दिया है।

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