
नई दिल्ली। रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने मंगलवार को कहा कि भारत की युवा शक्ति, स्वदेशी तकनीक, रक्षा क्षमता और नवाचार देश को आत्मनिर्भर एवं विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में युद्ध अब केवल पारंपरिक सैन्य क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष, साइबर, इलेक्ट्रॉनिक और सूचना क्षेत्र भी निर्णायक बन चुके हैं। ऐसे में तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता और एकीकरण के साथ पूरे राष्ट्र की क्षमताओं के समन्वित उपयोग की आवश्यकता है।
संजय सेठ एकीकृत रक्षा स्टाफ मुख्यालय के अंतर्गत संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र की ओर से यहां मानेकशॉ सेंटर में आयोजित ह्यरक्षा बलों के दृष्टिकोण से राष्ट्रीय पुनरुत्थान विषयक दूसरे वार्षिक ट्राइडेंट व्याख्यान में यह बात कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख एवं संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र के अध्यक्ष एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने की। संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र के महानिदेशक मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अशोक कुमार ने उद्घाटन सत्र का संचालन किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, रणनीतिक विशेषज्ञ, राजनयिक और रक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ मौजूद रहे।
संजय सेठ ने कहा कि भारत की युवा शक्ति देश के विकास और सुरक्षा की सबसे बड़ी ताकत है। सीमाओं पर सशस्त्र बलों के जवान देश की सुरक्षा के लिए कठिन परिस्थितियों में डटे हुए हैं। उनके पराक्रम और देश के युवाओं की ऊर्जा ने भारत को दुनिया में नई पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल अपने लिए निर्माण करने वाला देश नहीं है, बल्कि दुनिया के लिए निर्माण करने की क्षमता विकसित कर रहा है। उन्होंने ह्यमेक इन इंडियाह्ण से ह्यमेक फॉर द वर्ल्डह्ण तक की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, रक्षा उत्पादन, अंतरिक्ष और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है।
रक्षा राज्यमंत्री ने राष्ट्र निर्माण के लिए शक्ति की सात धाराओं का उल्लेख किया। इनमें विनिर्माण, कृषि एवं खाद्य उत्पादन, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, बुनियादी ढांचा एवं गतिशक्ति, रक्षा शक्ति, हरित एवं नीली अर्थव्यवस्था तथा सांस्कृतिक प्रभाव एवं सॉफ्ट पावर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी क्षेत्रों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाना भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए आवश्यक है।
उन्होंने देश में स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में स्टार्टअप की संख्या अब दो लाख से अधिक हो चुकी है। उन्होंने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में वृद्धि और मोबाइल विनिर्माण को देश की बदलती औद्योगिक क्षमता का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि देश में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार और आजीविका उपलब्ध करा रहे हैं तथा महिला उद्यमियों की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है।
संजय सेठ ने कहा कि उपग्रह आधारित तकनीक से फसल, पानी की उपलब्धता और कीटों से जुड़ी जानकारी किसानों तक पहुंचाई जा रही है। उन्होंने किसान सम्मान निधि, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी, चंद्रयान-3 की सफलता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को नई तकनीक विकसित करने और देश की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि देश का रक्षा उत्पादन लगातार बढ़ रहा है और रक्षा निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने युवाओं और स्टार्टअप को रक्षा क्षेत्र में नवाचार के लिए उपलब्ध कराई जा रही वित्तीय सहायता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मानवरहित प्रणालियां, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीक भविष्य की रक्षा तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
संजय सेठ ने युवाओं से बड़ा लक्ष्य तय करने, भारत में स्वदेशी तकनीक विकसित करने, देश की समस्याओं के समाधान के लिए नवाचार करने, केवल उपभोक्ता नहीं बल्कि निमार्ता बनने और अपने पेशे को राष्ट्र सेवा से जोड़ने का आह्वान किया।
