
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री सरदार हरदीप सिंह पुरी ने रविवार को कहा कि सिख विरोधी हिंसा में एकतरफा तरीके से हजारों लोगों की हत्या की गई, इसे नरसंहार और मानवता के विरुद्ध अपराध के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 42 साल बाद भी सिख समुदाय उस त्रासदी को पूरी तरह भुला नहीं पाया है। वे रविवार को हरि नगर में आयोजित मार्च में नेताओं और कार्यकतार्ओं को संबोधित कर रहे थे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आज दिल्ली के हरि नगर में 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इसका नेतृत्व केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने किया। इसमें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुल्का, सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी, मंत्री आशीष सूद, सरदार अरविंदर सिंह लवली और बड़ी संख्या में सिख समाज के लोगों ने हिस्सा लिया। मार्च के दौरान भाजपा नेताओं ने 1984 की हिंसा के पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने और घटना की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई।



हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि 1984 में दिल्ली में 2,733 और देशभर में करीब 3,325 लोगों की हत्या हुई थी। ये सरकारी आंकड़े हैं, जबकि सिख समाज इन्हें अधूरा मानता रहा है। उन्होंने कहा कि उस समय हमलावर मतदाता सूची देखकर सिख परिवारों के घरों तक नहीं पहुंच रहे थे बल्कि उन्हें पहले से लोगों की पहचान और उनके घरों की जानकारी दी जा रही थी। इससे स्पष्ट होता है कि हिंसा अचानक नहीं हुई थी, बल्कि इसके पीछे तैयारी थी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से पीड़ितों के दर्द को स्वीकार करने और पर्याप्त संवेदनशीलता दिखाने की जरूरत है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी कार्यक्रम के लिए दूसरी तारीख चुनी जा सकती थी तो 1 नवंबर को ही आयोजन करने की क्या जरूरत थी? उन्होंने कहा कि ऐसी हिंसा दोबारा देश या दुनिया में कहीं नहीं होनी चाहिए।
इस मौके पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि आज संविधान की प्रति लेकर चलने और लोकतंत्र की दुहाई देने वालों से सिख समाज पूछ रहा है कि नवंबर 1984 में जो हुआ, क्या वह लोकतंत्र की हत्या नहीं थी? हजारों परिवारों ने अपने परिजनों को खोया और अनेक माताएं, बहनें आज भी उस दर्द के साथ जी रही हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और गांधी परिवार 1984 की घटनाओं की जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। वर्ष 1975 के आपातकाल और 1984 की सिख विरोधी हिंसा को याद करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की बात करने वालों को पहले अपने अतीत का जवाब देना चाहिए।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने 1984 की हिंसा को कांग्रेस की सुनियोजित साजिश बताते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने सिख परिवारों के घरों की पहचान कर हिंसा को अंजाम देने में भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) के प्रयासों से नरसंहार के कुछ दोषियों को सजा मिल सकी। यशपाल को मृत्युदंड और नरेश शेरावत को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। मल्होत्रा ने बताया कि दिल्ली सरकार ने पीड़ित परिवारों के करीब 250 सदस्यों को नौकरी दी है और अब तीसरी पीढ़ी को भी रोजगार देने का निर्णय लिया है। मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस आज न्याय की बात कर रही है, जबकि 1984 की हिंसा के आरोपों से घिरे नेताओं को पार्टी ने बड़े राजनीतिक पदों पर बैठाया। उन्होंने सज्जन कुमार, जगदीश टाइटलर, एचकेएल भगत और धर्मदास शास्त्री का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस को पहले अपने अतीत का जवाब देना चाहिए।

