
नई दिल्ली। देश में नागरिक सुरक्षा नेटवर्क को मजबूत बनाने के लिए भारतीय सेना और केंद्रीय गृह मंत्रालय संयुक्त प्रशिक्षण पहल शुरू करने जा रहे हैं। इसके पहले चरण में 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 600 नागरिक सुरक्षा मास्टर ट्रेनरों को नवंबर के दूसरे सप्ताह में तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पहल के तहत प्रशिक्षित प्रत्येक मास्टर ट्रेनर अपने राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में 100 नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करेगा। इससे कुल 60 हजार स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप देश में आधुनिक प्रणालियों, तकनीक और समकालीन सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की क्षमता से लैस एक सशक्त नागरिक सुरक्षा नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने गत 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए इस नेटवर्क के निर्माण की घोषणा की थी।



मंत्रालय के अनुसार, अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा एवं गृह रक्षक महानिदेशालय भारतीय सेना के समन्वय से इस विशेष पायलट पहल को संचालित करेगा। इसके तहत प्रत्येक सहभागी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश से 50 मास्टर ट्रेनरों का चयन कर उन्हें भारतीय सेना के निर्धारित प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षित किया जाएगा। यह अपनी तरह की पहली संयुक्त प्रशिक्षण पहल है, जिसका उद्देश्य नागरिक सुरक्षा कर्मियों की आपात स्थितियों और उभरते सुरक्षा खतरों से निपटने की तैयारी को बेहतर बनाना है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में तीन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा। पहले क्षेत्र में आधुनिक एवं हाइब्रिड युद्ध, ड्रोन से जुड़े खतरों और हवाई हमलों के प्रति जागरूकता शामिल है। दूसरे क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा, रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल एवं परमाणु (सीबीआरएन) खतरों की जानकारी, घायलों के प्रबंधन तथा खोज एवं बचाव कार्यों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
तीसरे क्षेत्र में आपातकालीन संचार व्यवस्था, साइबर सुरक्षा संबंधी सावधानियों, डिजिटल प्रणालियों की मजबूती, नागरिक-सैन्य समन्वय और घटनास्थल पर कमान एवं नियंत्रण व्यवस्था जैसे विषय शामिल होंगे। इन प्रशिक्षण गतिविधियों का उद्देश्य नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को आपात स्थितियों में प्रभावी, समन्वित और त्वरित कार्रवाई के लिए तैयार करना है। इस पहल की प्रमुख विशेषता इसका मास्टर ट्रेनर मॉडल है। इसके तहत सेना से विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले 600 मास्टर ट्रेनर आगे अपने-अपने राज्यों में नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करेंगे। इस व्यवस्था से सीमित समय में प्रशिक्षण का दायरा व्यापक बनाने और जमीनी स्तर पर आपदा एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पहले चरण में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, मेघालय, सिक्किम, असम, उत्तर प्रदेश, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु को शामिल किया गया है। इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इसके परिणामों की समीक्षा की जाएगी। गृह मंत्रालय के अनुसार, पायलट चरण के अनुभवों के आधार पर इस पहल को चरणबद्ध तरीके से देश के शेष राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भी विस्तारित करने की योजना है। इससे नागरिक-सैन्य समन्वय को मजबूत करने, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा बढ़ाने और उभरते खतरों के मद्देनजर देश की आपातकालीन तैयारी को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

