
रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस एके चौधरी की अदालत में ईडी अधिकारियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज प्राथमिकी को रद करने की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हेमंत सोरेन की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से दोबारा समय मांगा गया। अदालत ने समय तो दिया, लेकिन लेकिन उन पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।



अदालत ने जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए दो नवंबर की तिथि निर्धारित की है। अदालत ने उक्त राशि झालसा में जमा करने का निर्देश दिया है। हेमंत सोरेन की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय मांगा गया।
लेकिन अदालत ने चार सप्ताह का समय दिया है। यह मामला ईडी के तत्कालीन अधिकारियों कपिल राज, देवव्रत झा सहित अन्य की ओर से दाखिल याचिका से जुड़ा है। अधिकारियों ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर हेमंत सोरेन की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी को रद करने की मांग की है। याचिका में प्राथमिकी की कार्रवाई और उसके आधार पर की जा रही जांच को चुनौती दी गई है। ईडी की ओर से एएसजीआइ एसवी राजू, वरीय अधिवक्ता अमित कुमार दास और सौरव कुमार ने पक्ष रखा।
हेमंत सोरेन की ओर से ईडी अधिकारियों पर पूछताछ और कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर उत्पीड़न किए जाने का आरोप लगाते हुए एससी-एसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसी प्राथमिकी के खिलाफ ईडी के अधिकारियों ने हाई कोर्ट का रुख किया है।
अधिकारियों की ओर से प्राथमिकी दर्ज किए जाने के साथ-साथ उसके आधार पर चल रही जांच की कार्रवाई को भी चुनौती दी गई है। इससे पहले हाई कोर्ट ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ पुलिस की ओर से जारी नोटिस पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा था।

