
रांची। सरकारी अस्पतालों को लेकर आम लोगों की पारंपरिक धारणा बदलती नजर आ रही है। रांची सदर अस्पताल अब केवल गरीब और जरूरतमंद मरीजों के इलाज तक सीमित नहीं रह गया है। यहां राज्यपाल से लेकर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और उनके परिजनों तक ने इलाज और चिकित्सा सेवाओं का लाभ लिया है। अस्पताल प्रबंधन इसे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ते भरोसे का संकेत मान रहा है।



राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार सदर अस्पताल में स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय परामर्श ले चुके हैं। पूर्व अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह ने यहां फिजियोथेरेपी कराई। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों और उनके परिजनों ने भी अस्पताल में उपचार कराया है।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, ग्रामीण विकास विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी की पत्नी की यहां सर्जरी भी हुई है। मुख्य सचिव अविनाश कुमार और उनके परिवार के सदस्यों के अलावा आईएएस अबु इमरान ने भी स्वयं और अपने परिजनों का इलाज सदर अस्पताल में कराया है। कोल्हान प्रमंडल के आयुक्त ने अपने करीबी को भी यहां भर्ती कराया है। अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. बिमलेश सिंह के अनुसार, अधिकारियों और उनके परिजनों का सरकारी अस्पताल में इलाज कराना स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ते विश्वास का संकेत है।
गंभीर बीमारियों के इलाज की भी सुविधा
सदर अस्पताल में अब जांच से लेकर गंभीर बीमारियों के उपचार तक कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। अस्पताल में 128 स्लाइस सीटी स्कैन, एमआरआई, डिजिटल एक्स-रे, 24 घंटे अल्ट्रासाउंड, कलर डॉप्लर, डायलिसिस, ईसीजी, टीएमटी, टेली-रेडियोलॉजी और टेली-आईसीयू जैसी सेवाएं संचालित हैं।
इसके अलावा न्यूरोसर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, तंत्रिका संचालन जांच और ईईजी जैसी विशेषज्ञ सेवाएं भी उपलब्ध हैं। अस्पताल में सामान्य चिकित्सा के साथ गहन चिकित्सा इकाई, हेमोडायलिसिस, हृदय रोग क्लीनिक और विभिन्न गैर-शल्य हृदय जांच की सुविधा दी जा रही है।
कैंसर उपचार के क्षेत्र में भी सदर अस्पताल की सेवाओं का विस्तार हुआ है। आयुष्मान भारत योजना के तहत कैंसर मरीजों को कीमोथेरेपी समेत अन्य उपचार उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कैंसर सर्जरी और विशेषज्ञ परामर्श की सुविधा भी शुरू की गई है।
आयुष्मान योजना में भी बेहतर प्रदर्शन
आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत भी सदर अस्पताल ने बेहतर प्रदर्शन किया है। वर्ष 2025 में अस्पताल को योजना के तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले अस्पतालों में प्रमुख स्थान मिला था। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सदर अस्पताल के मॉडल को राज्य के अन्य जिला अस्पतालों में लागू करने की जरूरत बताई थी। अस्पताल में दो लाख से अधिक आयुष्मान कार्डधारकों के उपचार का भी उल्लेख किया गया है।
डिजिटल हेल्थ हब के रूप में विकसित करने की तैयारी
सदर अस्पताल को आधुनिक डिजिटल स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम चल रहा है। टेली-आईसीयू और ई-संजीवनी जैसे डिजिटल स्वास्थ्य नेटवर्क के जरिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं दूसरे जिलों तक पहुंचाने की योजना है। इससे दूरदराज के मरीजों को स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह मिल सकेगी।
कैथ लैब और बोन मैरो यूनिट की तैयारी
अस्पताल में आने वाले महीनों में गंभीर बीमारियों के इलाज से जुड़ी सुविधाओं का और विस्तार किया जाएगा। जिला प्रशासन के अनुसार, कैथ लैब और पीईटी स्कैन सुविधा तीन से चार महीने के भीतर शुरू करने की दिशा में काम चल रहा है। वहीं, करीब छह महीने में बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट शुरू करने की तैयारी है।
बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए चार बिस्तरों वाली इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। इन सुविधाओं के शुरू होने से हृदय, कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों या निजी अस्पतालों पर निर्भरता कम हो सकती है।
शिशु और गैस्ट्रो विभाग में भी बढ़ेंगी सेवाएं
शिशु रोग विभाग में फिलहाल पांच चिकित्सक कार्यरत हैं। चिकित्सकों की संख्या बढ़ाकर सात करने की तैयारी है। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग में फिलहाल एक विशेषज्ञ हैं और एक अन्य विशेषज्ञ की नियुक्ति की योजना है। इससे बच्चों और पाचन तंत्र से जुड़ी जटिल बीमारियों के मरीजों को बेहतर विशेषज्ञ सेवाएं मिल सकेंगी।
डायलिसिस सुविधा का भी विस्तार किया जा रहा है। अस्पताल में पहले 10 बिस्तरों की डायलिसिस इकाई थी, जिसे बढ़ाने की दिशा में काम हुआ है। कैंसर मरीजों के लिए आयुष्मान योजना के तहत कीमोथेरेपी, हार्मोन और लक्षित उपचार जैसी सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
अधिकारियों का इलाज बढ़ते भरोसे का संकेत
सरकारी अस्पताल में आम मरीजों के साथ वरिष्ठ अधिकारियों और उनके परिवारों का इलाज कराना व्यवस्था में आए बदलाव का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। हालांकि अस्पताल की गुणवत्ता का आकलन केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि वहां कौन इलाज करा रहा है, लेकिन प्रशासनिक तंत्र से जुड़े लोगों का उसी स्वास्थ्य व्यवस्था का उपयोग करना सेवाओं और सुविधाओं पर बढ़ते भरोसे का संदेश जरूर देता है।
सदर अस्पताल अब पारंपरिक जिला अस्पताल की छवि से आगे बढ़कर बहुविशेषज्ञ चिकित्सा, आधुनिक जांच, कैंसर उपचार, गंभीर बीमारियों के इलाज और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं से लैस बड़े सरकारी स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

