
रांची। झारखंड में जेपीएससी की भर्ती परीक्षाओं के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। गुरुवार को न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा से संबंधित नियुक्तियां रद्द करने के सरकारी आदेश पर अगले आदेश तक रोक लगाते हुए राज्य सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) से जवाब मांगा है।



मामले में सफल एवं चयनित अभ्यर्थियों की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स और पीएएस पति ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।
दो अलग-अलग याचिकाओं में दीपमाला एवं अन्य तथा सोनम कुमारी ने जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के विज्ञापन संख्या 01/2024 को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती दी है। वहीं, सौरव सिंह एवं अन्य ने फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्तियां रद्द किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
नियुक्ति के बाद रद्द किया गया आदेश
याचिका में सोनम कुमारी ने बताया कि उन्होंने झारखंड में नियुक्ति के लिए दूसरी जगह की नौकरी छोड़ दी थी। उन्हें 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र मिला था और उन्होंने प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया था। इसके बाद 18 अगस्त को राज्य सरकार की अधिसूचना के जरिए संबंधित परीक्षा और नियुक्ति रद्द कर दी गई।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन बिना अभ्यर्थियों की व्यक्तिगत भूमिका की जांच किए और उन्हें सुनवाई का अवसर दिए नियुक्तियां रद्द करना उचित नहीं है।
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का दिया हवाला
अभ्यर्थियों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा दी और मेरिट के आधार पर चयनित हुए हैं। इसलिए किसी कथित अनियमितता के लिए सभी सफल अभ्यर्थियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। याचिकाकर्ताओं ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि कार्रवाई से पहले संबंधित अभ्यर्थियों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।
सरकार ने 18 अगस्त को लिया था बड़ा फैसला
गौरतलब है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सीआईडी जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात कई परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था। सरकार ने टीडीपीएल से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने के साथ वर्ष 2014 के बाद आयोजित विभिन्न नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच का भी आदेश दिया था।
कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से जारी अधिसूचनाओं में 22 परीक्षाओं को रद्द करने, छह परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और 17 अन्य परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने की जानकारी दी गई थी।
सरकार के फैसले के बाद चयनित और नियुक्त अभ्यर्थियों ने आंदोलन शुरू कर दिया था। अब हाईकोर्ट की अंतरिम रोक से संबंधित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। फिलहाल अगले आदेश तक इन नियुक्तियों को रद्द करने के सरकारी फैसले का प्रभाव नहीं पड़ेगा। राज्य सरकार और जेपीएससी के जवाब के बाद मामले की अगली सुनवाई में अदालत इस विवाद पर आगे की दिशा तय करेगी।

