
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को छात्रों के मुद्दे पर सदन में दोनों पक्षों ने हंगामा किया। सत्र के चौथे दिन सदन पूरी तरह बाधित रहा। न तो प्रश्नकाल हो सका और न ही शून्यकाल की सूचनाएं ली जा सकीं। हंगामा के बीच ही भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट रखी गई तथा झारखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कराया गया। सत्र शुरू होने से लेकर अबतक लगातार गतिरोध को देखते हुए स्पीकर रबीन्द्र नाथ महतो ने सदन की कार्यवाही एक दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। पांच दिनों के कार्यदिवस के तहत इस सत्र का समापन बुधवार को होना था। स्पीकर ने कहा कि उन्हें भारी मन से सदन की कार्यवाही एक दिन पहले ही स्थगित करनी पड़ रही है।
पहली पाली की कार्यवाही पूर्वाह्न 11.06 बजे जैसे ही शुरू हुई, कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने छात्रों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार को सदन में बताना चाहिए कि उनकी मांगों पर सरकार क्या विचार रखती है। वहीं, भाजपा के विधायक एक दिन पूर्व विधानसभा घेराव के क्रम में छात्रों के लाठीचार्ज के विरोध में आसन के पहुंचकर नारेबाजी करने लगे। विधायक परीक्षाओं की सीबीआइ जांच कराने तथा मुख्यमंत्री से इस्तीफा की भी मांग कर रहे थे।



दूसरी पाली में भी सदन की कार्यवाही शुरू होते हुए भाजपा के विधायकों ने एक बार फिर आसन के समक्ष प्रदर्शन शुरू कर दिया। जवाब में सत्ता पक्ष के भी विधायक और मंत्री वहां पहुंच गए। हंगामा के बीच ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपना अभिभाषण दिया।
इस बीच स्पीकर बार-बार दोनों पक्षों को सीट पर लौटने की अपील करते रहे, लेकिन मुख्यमंत्री की बातों को सुनने की बजाय दोनों पक्षों का एक-दूसरे के विरुद्ध प्रदर्शन जारी रहा। उनके प्रदर्शन के बीच ही बिना कोई चर्चा के झारखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2026 सदन में ध्वनिमत से पारित हो गया।
प्रदर्शन कर रहे विधायक सह पूर्व मंत्री सीपी सिंह ने आसन की ओर नोटों की गड्डी लहराई। उसपर मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि इनके आवास पर छापेमारी होगी तो वहां भी नोटों के बंडल मिलेंगे। स्पीकर ने मार्शल को सीपी सिंह के नोटों के बंडल को लाने के निर्देश दिए, लेकिन मार्शल के पहुंचने पर सीपी ने बंडल अपनी जब में रख लिए।
जवाब में सत्ता पक्ष के भी विधायक आसन के समक्ष पहुंचकर विपक्ष का विरोध करने लगे। दोनों ओर से हंगामा होने के कारण महज चार मिनट में ही स्पीकर को सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
दोबारा 12.03 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही दोनों पक्षों का वही रूख रहा। पहले भाजपा के विधायक आसन के समक्ष पहुंचे तो जवाब में सत्ता पक्ष के भी विधायक वहां पहुंच कर नारेबाजी करने लगे। इस क्रम में भाजपा के विधायकों ने विधानसभा के प्रभारी सचिव के टेबल तक थपथपाया।
इस बीच स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने भाजपा विधायकों की ओर इशारा करते हुए ह्यचंदा चोरह्ण के नारे लगाए। सत्ता पक्ष की ओर से मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, इरफान अंसारी, शिल्पी नेहा तिर्की और योगेंद्र महतो समेत अन्य विधायक आसन के समक्ष पहुंच गए।
हंगामे के बीच ही वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी। इसके बाद स्पीकर ने सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। पहली पाली में महज 10 मिनट ही सदन चल सका।

