
खगड़िया । बिहार के खगड़िया जिले में पुलिस ने खुद को आईएएस अधिकारी बताकर लोगों से कथित तौर पर ठगी करने और सरकारी अधिकारी के तौर रौब दिखाने वाले एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान गोगरी थाना क्षेत्र के जमालपुर बाजार निवासी मनीष कुमार उर्फ मनीष कुमार गुप्ता के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी अपनी निजी गाड़ियों पर भारत सरकार और आईएएस से जुड़े बोर्ड लगाकर लोगों के बीच दबदबा कायम करता था। खगड़िया के पुलिस अधीक्षक भानु प्रताप सिंह ने रविवार को बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि मनीष गुप्ता लंबे समय से खुद को आईएएस अधिकारी बताकर गोगरी थाना क्षेत्र के अलावा बिहार के अन्य जिलों में भी लोगों को भ्रमित कर कथित रूप से ठगी कर रहा है। सूचना के सत्यापन के बाद पुलिस टीम का गठन कर उसके घर पर छापेमारी की गई। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी ने खुद को केंद्रीय सतर्कता आयोग से जुड़ा व्यक्ति बताने की कोशिश की। इतना ही नहीं, उसने खुद को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का गुप्त एजेंट होने का भी दावा किया। पुलिस ने इन दावों को प्रथम दृष्टया फर्जी पाया है। उसके पास से ऐसा पहचान पत्र भी बरामद हुआ है, जिस पर खुद को आईएएस अधिकारी बताया गया था। छापेमारी के दौरान पुलिस को आरोपी के घर से करीब 31 लीटर विदेशी शराब बरामद हुई। बरामद शराब अलग-अलग विदेशी ब्रांड की बताई गई है।इसके अलावा बारहसिंगा के दो सींग भी बरामद हुए हैं। पुलिस ने बताया कि वन्यजीव से संबंधित यह बरामदगी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत गंभीर अपराध के दायरे में आती है। पुलिस ने आरोपी के पास से एक टेस्ला कार भी जब्त की है, जिस पर भारत सरकार का बोर्ड लगा हुआ था।पुलिस के मुताबिक, यह टेस्ला का बड़ा मॉडल है और इसमें पूर्ण स्वचालित ड्राइविंग से जुड़े अत्याधुनिक फीचर हैं। एसपी ने स्पष्ट किया कि इसे पूरी तरह चालक रहित कार कहना तकनीकी रूप से उचित नहीं होगा, लेकिन इसमें उन्नत ड्राइविंग सहायता प्रणाली से जुड़े फीचर मौजूद हैं। इसके अलावा टाटा सफारी गाड़ी भी बरामद की गई है, जिस पर कथित तौर पर ‘भारत सरकार’ का बोर्ड लगा था। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से एप्पल कंपनी के पांच मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, विभिन्न बैंकों के 20 क्रेडिट कार्ड, 8 डेबिट कार्ड और 4 चेकबुक भी बरामद की हैं। पुलिस का कहना है कि बरामद सामान और दस्तावेजों की जांच की जा रही है।पुलिस अधीक्षक भानु प्रताप सिंह ने बताया कि आरोपी की संपत्ति और उसके आय के स्रोतों का भी मूल्यांकन किया जा रहा है। मामले की वित्तीय जटिलताओं को देखते हुए आर्थिक अपराध इकाई की मदद भी ली जाएगी। पुलिस को आशंका है कि आरोपी ने लोगों को भ्रमित कर, ठगी या कथित भ्रष्ट गतिविधियों के माध्यम से संपत्ति अर्जित की है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी की संपत्ति बिहार के अलावा दूसरे राज्यों और विदेशों में भी होने की सूचना मिली है। हालांकि, इन दावों का अभी सत्यापन किया जा रहा है। एसपी ने कहा कि जांच आगे बढ़ने के साथ कई और तथ्य सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि मामला केवल फर्जी पहचान बनाकर लोगों को गुमराह करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें वित्तीय लेनदेन और संपत्ति से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।पुलिस ने संकेत दिया कि जांच के दौरान और आरोपी को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।




