
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परीक्षा सुधार को लेकर कहा कि एक सबसे बड़ी चुनौती परीक्षा सुधार है। इसके लिए भी एक कमेटी बनानी पड़ेगी क्योंकि टेक्नोलॉजी इतनी अधिक हो गई है कि अगर एक आदमी ने भी अपना ईमान बेच दिया तो प्रश्न पत्र मार्केट में आ जाता है। पूरे सिस्टम में अगर कोई एक आदमी फेल हो गया तो सब खराब हो जाता है। मुख्यमंत्री रविवार को शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला – सह चिन्तन शिविर के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।



चौधरी ने कहा कि सरकार ने तय किया है कि इसको लेकर एक कमेटी भी बनाई जाएगी और पूरी दुनिया में जिन टेक्नोलॉजी के तहत सभी परीक्षाएं कराई जाती हैं, उसके लिए भी एक कमेटी का गठन किया जाएगा। जितनी भी परीक्षाएं होती हैं, उसमें कुछ न कुछ दिक्कत आ जाती है। लेकिन अब फोकस करना पड़ेगा। युवा पीढ़ी को यह नहीं लगना चाहिए कि उनके साथ धोखा हुआ है।
चौधरी ने कहा कि सरकार के लिए आज मैट्रिक, इंटर और कॉलेज परीक्षा कराना भी चुनौती है। उन्होंने कहा कि टीचर्स की बहाली होती है, बीपीएससी को उसकी भी चिंता होती है। इसलिए सरकार ने तय किया है कि एक कमेटी बनाकर पारदर्शी तरीके से परीक्षा कराने को लेकर सुझाव पर विचार किया जाए। उन्होने कहा कि अब फोकस करना पड़ेगा। ताकि युवा पीढ़ी को यह नहीं लगना चाहिए उनके साथ धोखा हो रहा है। इसकी चिंता करनी पड़ेगी।
मुख्यमंत्री की ओर से कहा गया है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को हर विद्यालय तक पहुंचाने के लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया है, ताकि प्रत्येक विद्यालय को उत्कृष्टता का केंद्र बनाया जा सके और छात्रों के सीखने के स्तर में निरंतर सुधार सुनिश्चित हो।
सीएम ने कहा कि बिहार में परीक्षाओं को सुचारु, पारदर्शी, निष्पक्ष और आधुनिक बनाने के लिए राज्य स्तरीय परीक्षा सुधार समिति का गठन किया गया है। समिति बोर्ड एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ-साथ कक्षा-आधारित मूल्यांकन में तकनीक और एआई के उपयोग के माध्यम से छात्रों के ज्ञान, समझ एवं विश्लेषण क्षमता के बेहतर आकलन के लिए सुझाव देगी।
छात्रों के लिए विशेष सहयोग शिविर : मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि शिक्षा सुधार के लिए विशेष सहयोग शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनमें मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक और छात्रों के साथ संवाद कर उनके सुझाव एवं समस्याएं सुनी जाएंगी।

