
नई दिल्ली। भारतीय भुगतान परिषद (पीसीआई) ने कहा कि भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन के बावजूद आम उपभोक्ता और छोटे कारोबारी एकीकृत भुगतान प्रणाली (यूपीआई) का इस्तेमाल किसी शुल्क के बगैर करते रहेंगे। पीसीआई का यह बयान लोकसभा में कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित होने के एक दिन बाद आया है, जिसमें सरकार को यूपीआई सहित अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने की अनुमति देने का प्रावधान किया गया है।पीसीआई ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कहा कि 2016 में शुरू होने के बाद से यूपीआई से उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त रहा है और आगे भी बिना किसी लेन-देन शुल्क के डिजिटल भुगतान जारी रहेगा। परिषद ने ये भी स्पष्ट किया कि किराना दुकानों सहित छोटे व्यापारियों को यूपीआई भुगतान स्वीकार करने पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क नहीं देना होगा।इसके साथ ही पीसीआई ने कहा कि भविष्य में यदि बड़े कारोबारियों पर मर्चेंट सेवा शुल्क लगाया जाता है, तब भी उपभोक्ताओं को यूपीआई इस्तेमाल करने के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। परिषद ने यह स्पष्ट किया है कि जहां भी लागू हो, एमडीआर शुल्क व्यापारी और भुगतान सेवा प्रदाताओं के बीच व्यावसायिक व्यवस्था होती है। इसका बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ता है।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इस विधयेक के पास होने के बाद ये स्पष्ट किया था कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) केवल कारोबारियों पर लागू होता है। सीतारमण ने बताया कि ग्राहकों से इसका कोई लेना-देना नहीं है। ये निवेश वित्तीय ढांचे और सुरक्षा को मजबूत करता है। इस संबंध में भारतीय भुगतान परिषद (पीसीआई) ने भी पुष्टि की है कि यूपीआई सेवाएं उपभोक्ताओं के लिए पूरी तरह मुफ्त बनी रहेंगी।उल्लेखनीय है कि, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा था कि एमडीआर शुल्क ग्राहकों पर नहीं, बल्कि ये कारोबारियों पर लागू होता है। इससे मिलने वाली राशि का उपयोग बैंक और वित्तीय-प्रौद्योगिकी कंपनियां अपने अवसंरचना एवं सुरक्षा सुधार में करती हैं। साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेता जयराश रमेश के उस दावे को भी खारिज किया था, जिसमें कहा गया था कि आम लोगों पर यूपीआई इस्तेमाल का बोझ बढ़ सकता है।




