
भुरकुंडा (रामगढ़)। हरियाणा के हिसार जिले के नलवा गांव के एक साधारण किसान परिवार से निकलकर ओपी जिंदल ने अपने दृढ़ संकल्प, अथक परिश्रम और दूरदर्शी सोच के बल पर ऐसा औद्योगिक साम्राज्य खड़ा किया था। जिससे देश के इस्पात, ऊर्जा, अवसंरचना और विनिर्माण क्षेत्र को नई दिशा दी। उनके द्वारा स्थापित मूल्यों—ईमानदारी, गुणवत्ता, नवाचार और राष्ट्रहित की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है।



ओम प्रकाश जिंदल (बाऊजी) का जन्म 7 अगस्त 1930 को हरियाणा के हिसार जिले के नलवा गांव में हुआ था। उन्हें मैन आॅफ स्टील कहा जाता था। उन्होंने साधारण शुरूआत से देश में स्टील, पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में विशाल औद्योगिक साम्राज्य की नींव रखी। ओपी जिंदल का मानना था कि मजबूत उद्योग ही किसी भी राष्ट्र की आर्थिक शक्ति का आधार होते हैं। रोजगार सृजन, आत्मनिर्भरता और सामाजिक विकास के लिए उद्योगों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आज मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत-2047 के संकल्पों के बीच उनके विचार पहले से अधिक प्रासंगिक दिखाई देते हैं।
श्री जिंदल शिक्षा को राष्ट्र के भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति मानते थे। उनके अनुसार शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि नेतृत्व, नैतिकता, संवेदनशीलता और वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करने का आधार है। उनकी प्रेरणा से स्थापित शैक्षणिक संस्थान आज हजारों युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर भविष्य की दिशा प्रदान कर रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास, कौशल विकास, खेल और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में उनके द्वारा शुरू की गई पहल आज भी समाज को लाभ पहुंचा रही हैं। उनके लिए विकास तभी सार्थक था, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
श्री जिंदल की अमर विरासत उद्योग, शिक्षा और सेवा के समन्वय पर आधारित है, जो विकसित, आत्मनिर्भर और समावेशी भारत के निर्माण की मजबूत नींव है।

