
पटना। राज्य में आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों को जीविका दीदियों के माध्यम से सिली हुई पोशाक देने की शुरुआत हो गई है। इसी तर्ज पर अब प्रारंभिक स्कूल के कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को भी जीविका दीदी के स्तर से पोशाक देने की पहल की जाएगी। यह घोषणा ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कही। वे रविवार को शहर में मौजूद दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान के सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।



इस कार्यक्रम में समाज कल्याण विभाग के मंत्री मदन सहनी के साथ संयुक्त रूप से मंत्री श्रवण कुमार आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों को जीविका दीदियों के स्तर से निर्मित पोशाक का वितरण कर रहे थे।
उन्होंने शिक्षा विभाग के साथ इस मामले को लेकर पहल करने के लिए अपने विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार को कहा। ताकि दोनों विभागों के बीच जल्द एक उच्च स्तरीय बैठक हो सके और इस पर अंतिम निर्णय बन सके।
दोनों मंत्रियों ने विभागीय अधिकारियों के साथ अलग–अलग केंद्रों पर जाने वाले छोटे–छोटे बच्चों को एक जोड़ी पोशाक का वितरण कर रहे थे। पोशाक पाने वाले छोटे बच्चों में सबसे पहला नाम आरोही का था, इसके बाद आदित्य, कार्तिक, खुशी, कृतिका, पीहू, रौशनी, अमन, विवेक समेत अन्य बच्चे शामिल थे। पोशाक की थैली लेकर बच्चे बेहद उत्साहित और खुश दिखे और इन्हें प्रदान करने वाले मंत्री और अधिकारी उनसे भी अधिक खुश थे। मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि हाल में स्वरोजगार प्रोत्साहन योजना के तहत जीविका समूह की 1 करोड़ 54 लाख दीदियों को 10–10 हजार रुपए की राशि दी गई थी।
इनमें जिन दीदियों ने सिलाई मशीन खरीदने के नाम पर राशि ली है, उन्हें भी समूह बनाकर पोशाक निर्माण के कार्य से जोड़ा जाएगा। अभी पोशाक तैयार करने के काम में करीब एक लाख महिलाएं 1050 केंद्रों के माध्यम से जुड़ी हुई हैं। आने वाले समय में इससे 5 लाख से अधिक महिलाओं को रोजगार मुहैया कराया जाएगा।
इसे ध्यान में रखते हुए स्कूल के बच्चों को भी पोशाक उपलब्ध कराने की कवायद की जा रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस बार 1 करोड़ से अधिक युवाओं और लोगों को रोजगार प्रदान करने के संकल्प को बड़ा बल मिलेगा।

