
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों के सचिवों की एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की जिसमें प्रमुख नीतिगत सुधारों, प्रशासनिक दक्षता, कारोबार सुगमता तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार की दीर्घकालिक रणनीति की समीक्षा की गई। करीब चार घंटे चली इस बैठक में कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी. के. मिश्रा, प्रधान सचिव शक्तिकांत दास, सैन्य मामलों के विभाग (डीएमए) के सचिव तथा विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के सचिव शामिल हुए। मौजूदा वित्तीय वर्ष में यह प्रधानमंत्री की सभी केंद्रीय सचिवों के साथ पहली व्यापक समीक्षा बैठकों में से एक थी। सूत्रों के अनुसार, बैठक का उद्देश्य वर्ष 2026 की दूसरी छमाही के लिए सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप शीर्ष नौकरशाही को तैयार करना तथा प्रमुख सुधारों और सुशासन संबंधी पहलों के क्रियान्वयन में तेजी लाना था। बैठक में ईज आॅफ डूइंग बिजनेस को प्रमुखता से उठाया गया। अधिकारियों ने प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने, नियामकीय बोझ कम करने, अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाने और भारत की आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की।



इसके साथ ही नागरिक-केंद्रित सुधारों और सार्वजनिक सेवाओं की बेहतर उपलब्धता के माध्यम से ईज आॅफ लिविंग (ईओएल) को बेहतर बनाने के उपायों की भी समीक्षा की गई। बैठक में सचिवों ने ‘विकसित भारत 2047’ के रोडमैप पर अपने-अपने मंत्रालयों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने मंत्रालयवार कार्यान्वयन रणनीतियों और दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों की जानकारी दी, जिनका उद्देश्य स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है।
मोदी ने 52 सप्ताह में 52 सुधार अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की। इस दौरान निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रशासनिक सुधार लागू करने के लिए मंत्रालयों के प्रदर्शन और कार्यान्वयन की स्थिति का आकलन किया गया। बैठक में अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर भी विशेष जोर दिया गया। विभिन्न मंत्रालयों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल तकनीकों के उपयोग से कार्यकुशलता बढ़ाने, निर्णय प्रक्रिया को तेज करने और विभागीय प्रक्रियाओं में होने वाली देरी कम करने के संबंध में अपनी प्रगति साझा की।
सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने-अपने मंत्रालयों के प्रदर्शन, सुधारों की उपलब्धियों, क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों और नीतिगत परिणामों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दीं। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब केंद्र सरकार प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने, नियमों को सरल बनाने और परिणामोन्मुखी सुशासन सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दे रही है। पिछले दो महीनों से भी कम समय में शीर्ष नौकरशाही के साथ प्रधानमंत्री की यह दूसरी महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक थी।
इससे पहले 21 मई को भी प्रधानमंत्री ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद और विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों के साथ बैठक कर ‘विकसित भारत 2047’ के अनुरूप नियामकीय रोडमैप तैयार करने की समीक्षा की थी। उस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज करने, फाइलों के अनावश्यक लंबित रहने की प्रवृत्ति समाप्त करने तथा संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से शासन व्यवस्था को सरल बनाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने यह भी कहा था कि ‘विकसित भारत 2047’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि देश की दीर्घकालिक राष्ट्रीय प्रतिबद्धता है।
मई में हुई समीक्षा बैठक के दौरान विभिन्न मंत्रालयों के प्रदर्शन का भी आकलन किया गया था। जिन मंत्रालयों की रैंकिंग अपेक्षाकृत कम रही, उन्हें अपने कार्य में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया। सूत्रों के अनुसार, इस अभ्यास को सरकार के समग्र प्रदर्शन के मध्यावधि मूल्यांकन के रूप में देखा गया। प्रधानमंत्री ने उस बैठक में मंत्रियों से जनसंपर्क को और मजबूत करने तथा पिछले 12 वर्षों में सरकार की उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने का भी आग्रह किया था। उन्होंने सुशासन के साथ-साथ नागरिक सहभागिता को भी समान रूप से महत्वपूर्ण बताया।

