कोलकाता। एक जून को सातवें चरण की वोटिंग के बाद इंडिया गठबंधन के नेता दिल्ली में बैठक करेंगे, इस बैठक में ममता बनर्जी शामिल नहीं होंगी। उन्होंने एक बार फिर बंगाल में इंडिया गठबंधन से दूरी बना ली। चुनाव से पहले भी वह कई बैठकों से नदारद रहीं। हालांकिदीदी की तरफ से बयान आया कि साइक्लोन प्रभावित पश्चिम बंगाल में राहत कार्य उनकी प्राथमिकता है, इसलिए वह दिल्ली नहीं जाएंगी।

पॉलिटिकल एक्सपर्ट मानते हैं कि ममता बनर्जी ने चुनावी नतीजों को भांप लिया है, इसलिए वह वेट एंड वॉच के मूड में हैं। बंगाल में इस बार बंपर वोटिंग हुई है और बीजेपी बड़ी जीत का दावा कर रही है। सूत्रों के अनुसार, एक जून की बैठक में इंडिया ब्लॉक के नेता पीएम पद के दावेदारों और रिजल्ट के बाद की रणनीति पर चर्चा करेगी। इस मीटिंग में नए सहयोगी दलों की तलाश पर भी बात होगी।

पिछले साल के दौरान ममता इंडिया ब्लॉक के साथ भी रहीं और दूर भी। 23 जून को इंडिया ब्लॉक की पहली मीटिंग पटना में हुई थी, जिसके संयोजक नीतीश कुमार थे। इसके बाद विपक्षी दलों के गठबंधन की तीन और मीटिंग हुई, जिसमें ममता बनर्जी शामिल हुईं। तीसरी मीटिंग के बाद इंडिया गठबंधन के कई नेताओं ने अलग राह चुन ली। 19 दिसंबर को दिल्ली में हुई चौथी बैठक के बाद बंगाल में सीटों के बंटवारे पर कांग्रेस से खींचतान हुई। ममता बनर्जी ने एकतरफा बंगाल की सभी 42 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। मजबूर कांग्रेस बंगाल में वाम दलों के साथ चुनाव में उतरी। आखिरी बार 31 मार्च को अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली में हुई लोकतंत्र बचाओ रैली में विपक्षी दलों के नेता जुटे, मगर उसमें ममता दीदी नहीं आई। उन्होंने अपने टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन को भेज दिया। इस बीच ममता बनर्जी का एक बयान भी आया, जिसमें पहले उन्होंने इंडिया गठबंधन की संभावित सरकार को बाहर से समर्थन देने की घोषणा की, हालांकि बाद में उन्होंने अपना इरादा बदल दिया।

राजनीति के जानकारों का मानना है कि चुनाव के रिजल्ट से पहले विपक्षी दल एक-दूसरे की ताकत आंकने की कोशिश करेंगे। केंद्र में सरकार बनाने के लिए 272 लोकसभा सीटों की जरूरत होगी। जो जितनी सीटें जीतेगा, उसे उतनी हिस्सेदारी मिल सकती है। ममता बनर्जी इस गठबंधन की बड़ी स्टेक होल्डर हो सकती हैं, बशर्ते वह बंगाल में 30 से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज करे। ऐसा ही हाल बिहार में तेजस्वी यादव, तमिलनाडु में स्टालिन और महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और शरद पवार की है। इन नेताओं को भी हिस्सेदारी के लिए लोकसभा चुनाव के रिजल्ट में 90 फीसदी से ज्यादा सीटों से सफलता हासिल करनी होगी। बंगाल में मुकाबला कड़ा है और इस चुनाव में ममता बनर्जी की प्रतिष्ठा दांव लगी है। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर मोदी मैजिक, मुफ्त राशन और आक्रमक चुनाव प्रचार के बाद 400 पार करने का दावा कर रही है। ऐसे में इंडिया गठबंधन के लिए ज्यादा हासिल की संभावना कम हो जाती है। छह चरणों के मतदान के बाद वोटिंग पैटर्न भी इशारा दे रहा है कि इस बार कोई बड़ा बदलाव नहीं हो रहा है। ममता बनर्जी इन नतीजों को भांप चुकी हैं, इसलिए वह रिजल्ट के बाद ही अपने पत्ते खोलेंगी।

एक जून को इंडिया गठबंधन की बैठक से ममता बनर्जी की दूरी का दूसरा पहलू भी है। 4 जून को रिजल्ट के बाद क्लियर होगा कि इंडिया गठबंधन में शामिल राजनीतिक दलों को कितनी सीटें मिली हैं। इसके बाद ही नेताओं की हैसियत भी तय होगी। कांग्रेस ने चुनाव से पहले इंडिया गठबंधन की मीटिंग में राहुल गांधी के लिए एजेंडा तय कर रखा था। राहुल गांधी ने मीटिंग में बिना चर्चा किए प्रेस कॉन्फ्रेंस में जातीय जनगणना और ओबीसी आरक्षण का राग छेड़ दिया था। बताया जाता है कि इससे ममता दीदी नाराज भी हुईं। इसके बाद कांग्रेस से सीटों के बंटवारे को लेकर भी उन्होंने अलग रास्ता अपनाया था। वोटिंग के तुरंत बाद मीटिंग में पीएम कैंडिडेट और सरकार बनाने की संभावनाओं पर बातचीत होगी। साथ में, एक साल में पकी खिचड़ी की हांडी भी फूटेगी। टीएमसी के रणनीतिकार मानते हैं कि अब विपक्षी दलों की मीटिंग में उस पार्टी की चलेगी, जिसके पास ज्यादा नंबर हैं। चुनाव का रिजल्ट 4 जून को आएगा, इसलिए ममता बनर्जी ने कांग्रेस समेत अन्य दलों के लिए तोलमोल का रास्ता बंद कर दिया है।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version