रांची। मेन रोड स्थित राज अस्पताल में एक मरीज की मौत के बाद उत्पन्न विवाद और स्वजनों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों की जांच के लिए जिला प्रशासन ने चार सदस्यीय जांच टीम का गठन कर दिया है। मुख्यमंत्री के संज्ञान लेने के बाद उपायुक्त ने मामले की जांच कराने का निर्देश दिया था, जिसके तहत सिविल सर्जन कार्यालय ने चिकित्सकीय जांच के लिए दो डाक्टरों को नामित किया है, इनमें डॉ. एस अली और डॉ. राजीव रंजन शामिल हैं। वहीं जिला प्रशासन की ओर से दो अधिकारियों को भी जांच दल में शामिल है।

सिविल सर्जन डा. प्रभात कुमार ने बताया कि जांच दल शनिवार से मामले की पड़ताल शुरू कर दी है। टीम अस्पताल में मरीज के उपचार से संबंधित दस्तावेजों, चिकित्सकीय प्रक्रिया, अस्पताल प्रबंधन की भूमिका तथा स्वजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच करेगी। जांच पूरी होने के बाद सभी सदस्य अपनी रिपोर्ट सीधे उपायुक्त को सौंपेंगे। गौरतलब है कि दो दिन पूर्व एक अस्पताल में भर्ती एक मरीज की मौत के बाद स्वजनों ने चिकित्सकों और अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया था। स्वजनों का कहना था कि इलाज के दौरान मरीज के पैर में संक्रमण फैल गया था, जबकि अस्पताल ने करीब 18 लाख रुपये का बिल थमा दिया।

इसमें से 10 लाख बीमा से अस्पताल को मिला। बाकी भुगतान मरीज के स्वजनों द्वारा किया गया, लेकिन पूरा भुगतान नहीं हुआ और अब 2.5 लाख बकाया रह गया है।

इसे लेकर अस्पताल परिसर में हंगामा भी हुआ था। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। अब गठित जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

वहीं, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज राजू कुमार रंजन 24 मई को अस्पताल में भर्ती हुआ था। सिर पर गंभीर चोट,रीढ़ की हड्डियों में फ्रैक्चर और दोनों फेंफड़ों में गंभीर चोट थी। मरीज का जीवन बचाने के लिए चार दिनों से चिकित्सकों के द्वारा मरीज के घरवालों को एम्प्यूटेशन कराने की सलाह दी गई थी लेकिन घरवाले नहीं मानें। शनिवार को सरकारी टीम की इंक्वायरी हुई जिसमें इलाजरत डाक्टरों द्वारा पूरा सहयोग किया गया और मांगे गए सब तथ्य तथा रिकार्ड प्रस्तुत किया गया।

विधायक सीता सोरेन ने अस्पताल को बताया लूट का अड्डा : विधायक सीता सोरेन ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लिखा, “रांची का राज अस्पताल या ‘लूट का अड्डा’? पैर के मामूली फ्रैक्चर के इलाज के नाम पर 16 लाख से 22 लाख रुपये का भारी-भरकम बिल और अंत में 18 साल के मासूम राजू की मौत! यह इलाज नहीं, सीधे तौर पर डकैती है।”

बीजेपी विधायक ने लिखा कि सरकार में निजी अस्पतालों की यह मनमानी और संवेदनहीनता चरम पर है। सिर्फ जांच के दिखावे से काम नहीं चलेगा, इस अस्पताल का लाइसेंस तुरंत रद्द हो और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाए। जनता की जान की कोई कीमत नहीं बची क्या? मै पीड़ित परिवार के साथ खडी हूँ और इस ‘मेडिकल मर्डर’ के खिलाफ अंतिम सांस तक न्याय की लड़ाई लडूंगी।

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