
पटना। बिहार सरकार ने ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा-27 के तहत पहली बार ग्राम पंचायत कर, दर एवं शुल्क नियमावली-2026 को मंजूरी दी गई। इसके लागू होने के बाद राज्य की ग्राम पंचायतें निर्धारित सीमा के भीतर विभिन्न प्रकार के कर और शुल्क वसूल सकेंगी। कैबिनेट बैठक में कुल 25 प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई।



कैबिनेट के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने बताया कि अधिनियम में प्रावधान होने के बावजूद अब तक पंचायतों के लिए कर वसूली की नियमावली नहीं बनी थी। नई व्यवस्था से पंचायतों की स्वयं की आय (ओएसआर) बढ़ेगी और विकास कार्यों के लिए राज्य सरकार पर उनकी निर्भरता कम होगी।
पंचायत चुनाव से पहले होगा परिसीमन
मंत्रिमंडल ने वर्ष 2011 की जनसंख्या के आधार पर ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद क्षेत्रों के परिसीमन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। परिसीमन के बाद कई गांव नई पंचायतों में शामिल हो सकते हैं तथा वार्डों और पंचायतों की सीमाओं में बदलाव संभव है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य बढ़ी हुई आबादी के अनुरूप संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। आगामी पंचायत चुनाव परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नई सीमाओं के आधार पर कराए जाएंगे।
दो-तीन पहिया और व्यावसायिक वाहनों पर बढ़ा रोड टैक्स
कैबिनेट ने बिहार मोटरवाहन करारोपण अधिनियम, 1994 में संशोधन को भी मंजूरी दी है। इसके तहत दोपहिया वाहनों के एकमुश्त मोटर वाहन कर में एक प्रतिशत की वृद्धि की गई है। तिपहिया वाहनों पर एक हजार रुपये अतिरिक्त कर देना होगा। वहीं व्यावसायिक वाहनों के व्यापार कर में चार गुना तक बढ़ोतरी का निर्णय लिया गया है। सरकार के अनुसार लंबे समय से कर दरों में संशोधन नहीं हुआ था, इसलिए नई दरें लागू की गई हैं।

