पटना। बिहार में संभावित राजनीतिक पुर्नसंरचना की चर्चाओं के बीच भाजपा में मुख्यमंत्री पद को लेकर हलचल तेज हो गई है। पार्टी के भीतर कई संभावित दावेदारों की सक्रियता बढ़ने की चर्चा है। सत्ता एवं संगठन के गलियारों में यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार के पुनर्गठन की स्थिति में भाजपा कोटे के कुछ मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं, जबकि कुछ को कैबिनेट से बाहर भी किया जा सकता है। इन चर्चाओं के बीच मंत्रियों एवं नेताओं की बेचैनी भी बढ़ी हुई है। इस मध्य पार्टी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पृष्ठ भूमि वाले कार्यकतार्ओं को भी आगे बढ़ाने की पहल की जा रही है।

राजनीतिक चर्चा है कि नई सरकार के गठन या बड़े फेरबदल की स्थिति में जातीय एवं क्षेत्रीय संतुलन को प्रमुख आधार बनाया जाएगा। साथ ही संगठन की नाराजगी, मंत्रियों के प्रदर्शन एवं रणनीति को ध्यान में रखते हुए कुछ नए चेहरों को भी मौका देने पर विचार हो सकता है।

अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर ही होना है, लेकिन संभावित समीकरणों को लेकर प्रदेश स्तर पर सक्रियता तेज हो गई है। पार्टी नेतृत्व इस बात पर भी नजर रखे हुए है कि संगठन के भीतर किस वर्ग या क्षेत्र की नाराजगी को संतुलित करना जरूरी है। ऐसे में नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह देने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदारों में संगठन और सरकार दोनों स्तर के कुछ प्रमुख चेहरे सक्रिय माने जा रहे हैं। इनमें कुछ वर्तमान मंत्री हैं तो कुछ ऐसे नेता भी हैं जिनकी संगठन में मजबूत पकड़ मानी जाती है। हाल के दिनों में इन नेताओं की दिल्ली और पटना के बीच बढ़ी आवाजाही, कार्यकतार्ओं से संपर्क और राजनीतिक गतिविधियों में तेजी को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

पार्टी के जानकारों का कहना है कि अंतिम निर्णय पूरी तरह केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर ही होगा। ऐसे में प्रदेश स्तर पर चल रही सक्रियता को दावेदारी से अधिक संभावित राजनीतिक परिस्थितियों की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर भाजपा ने इस तरह की किसी कवायद से इनकार किया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों और संभावित चेहरे को लेकर कयासों का दौर जारी है।

सम्राट की राजनीतिक पारी लंबी : भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदारों में कुछ प्रमुख भाजपा नेताओं के नाम चर्चा में हैं। इनमें उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पिछड़ा वर्ग चेहरे के रूप में देखा जाता है। राज्यव्यापी राजनीतिक सक्रियता के कारण उन्हें प्रमुख दावेदारों में गिना जा रहा है।

राजद, जदयू एवं हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के उपरांत भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टी में संगठनात्मक कामकाज अनुभव है। उपरोक्त पार्टियों में अंतराल के साथ लगभग ढाई दशक से राजनीतिक एवं प्रशासनिक दायित्व का समय-समय निर्वहन करते रहे हैं।

नित्यानंद हैं संगठन के खांटी कार्यकर्ता : केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, युवा मोर्चा से लेकर भाजपा संगठन में विभिन्न पदों पर 35 वर्ष से कामकाज का लंबा अनुभव है। भाजपा के खांटी कार्यकर्ता के रूप में पहचान है। 11 वर्ष से केंद्र सरकार में गृह राज्य मंत्री का दायित्व निर्वहन कर रहे हैं।

संगठन का मजबूत चेहरा माना जाता है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके राय का संगठनात्मक नेटवर्क और केंद्रीय नेतृत्व से निकटता उन्हें भी संभावित दावेदारों की सूची में बनाए रखती है।

जायसवाल पर भी शीर्ष नेतृत्व की नजर : उद्योग एवं पथ निर्माण मंत्री दिलीप जायसवाल पर भी भाजपा शीर्ष नेतृत्व की नजर है। वैश्य में कलवार समाज से आते हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के साथ संगठन में लंबे समय तक कोषाध्यक्ष का दायित्व निर्वहन कर चुके हैं। लगातार तीसरी बार स्थानीय प्राधिकार से विधान पार्षद चुनकर आए हैं। सीमांचल में भाजपा के प्रमुख चेहरा हैं। तीन दशक लंबा राजनीतिक अनुभव है।

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