रांची। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में गड़बड़ी मामले में सीआइडी जांच को सच सामने लाने की बजाय सबूत मिटाने का प्रयास बताया है। रविवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को इस पूरे मामले की जांच सीबीआई से करानी चाहिए। आरोप लगाया कि झारखंड में सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए पांच लाख, मुख्य परीक्षा के लिए 25 लाख रुपये और साक्षात्कार पास कराने के लिए 10 लाख रुपये यानी कुल 40 लाख रुपये का रेट चार्ट है।

मरांडी ने कहा कि शराब घोटाले से लेकर जेएसएससी सीजीएल परीक्षा सहित अन्य मामलों में सीआइडी जांच कभी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचती, यह चार्जशीट तक दाखिल तक नहीं कर पाती।बाबूलाल ने कहा कि कर्नाटक के एक छात्र ने जनवरी में ही जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल खियांग्ते को पत्र लिखकर ओएमआर शीट में गड़बड़ी और टीडीपीएल के कर्मचारी अभय तिवारी की कारस्तानी के संबंध में बतलाया था।

इसके पूर्व भी रेंज अफसर की परीक्षा में गड़बड़ी की जानकारी उन्हें थी। दोनों मामलों में तत्कालीन अध्यक्ष ने कोई कार्रवाई नहीं की। सरकार को एल. खियांग्ते के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कर उन्हें तत्काल गिरफ्तार किया जाना चाहिए। बाबूलाल ने जेएसएससी के सचिव सुधीर गुप्ता, पूर्व मुख्य परीक्षा नियंत्रक विशाल कुमार के विरुद्ध भी गंभीर आरोप लगाए। साथ ही सीआइडी के अपर महानिदेशक मनोज कौशिक की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें तीन तीन पदों पर रखा गया है। उनके जिम्मे कोयला, बालू सहित अन्य खनिज संपदा में उगाही का काम है।

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