पटना। अब श्रावणी मेले की आस्था, संस्कृति और रंगों को कैमरे में कैद करने वालों के लिए सुनहरा मौका है। पर्यटन विभाग ने कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर्स के लिए विशेष वीडियो मेकिंग प्रतियोगिता शुरू की है। श्रावणी मेला 2026 : इन्फ्लुएंसर की नजर से’ थीम पर आधारित इस प्रतियोगिता में आकर्षक पुरस्कार दिए जाएंगे। प्रतियोगिता का उद्देश्य श्रावणी मेले के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को देश-दुनिया तक पहुंचाना है। इस पहल के जरिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बिहार की सांस्कृतिक पहचान को नई उड़ान मिलेगी। प्रतिभागियों को अपने कैमरे से मेले की अनोखी झलक दुनिया के सामने लानी होगी।रील और वीडियो बनाएंगे पहचान, मिलेंगे लाखों रुपये : प्रतियोगिता में कम से कम 25 हजार फॉलोअर्स वाले कंटेंट क्रिएटर्स हिस्सा ले सकेंगे। प्रथम पुरस्कार के रूप में तीन लाख रुपये दिए जाएंगे। दूसरे स्थान पर रहने वाले प्रतिभागी को दो लाख रुपये का पुरस्कार मिलेगा। तीसरे स्थान के विजेता को एक लाख रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा चौथे स्थान पर रहने वाले दो प्रतिभागियों को 50-50 हजार रुपये मिलेंगे। पांच प्रतिभागियों को 25-25 हजार रुपये के प्रशंसा पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे।पर्यटन सचिव लोकेश कुमार सिंह ने बताया कि श्रावणी मेले का आयोजन 30 जुलाई से 28 अगस्त तक होगा। प्रतिभागियों को मुंगेर, बांका और भागलपुर स्थित कांवरिया पथ से जुड़े वीडियो और रील तैयार करनी होगी। वीडियो की न्यूनतम अवधि 30 सेकेंड और अधिकतम दो मिनट निर्धारित की गई है। तैयार वीडियो को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।इसके बाद उसे विभागीय वेबसाइट के लिए भी उपलब्ध कराना होगा। रचनात्मकता, प्रस्तुति और प्रभाव के आधार पर विजेताओं का चयन किया जाएगा। सभी प्रविष्टियां गूगल फॉर्म के माध्यम से भेजी जाएंगी। इसका लिंक पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाएगा। इच्छुक प्रतिभागी विभाग की आधिकारिक ई-मेल आईडी पर संपर्क कर सकते हैं। यह प्रतियोगिता बिहार की सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल मंच पर पहचान दिलाने का प्रयास है। इसके जरिए युवा क्रिएटर्स को अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा अवसर मिलेगा। अब बाबा बैद्यनाथ की भक्ति और सोशल मीडिया की क्रिएटिविटी साथ-साथ नजर आएगी।कांवरिया पथ से कंटेंट तक, अब आस्था भी बनेगी ट्रेंड : श्रावणी मेला सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक पहचान का बड़ा उत्सव है। अब इस उत्सव को दुनिया तक पहुंचाने की जिम्मेदारी डिजिटल क्रिएटर्स के हाथों में होगी। कांवरियों की आस्था, भक्ति और यात्रा के रंग सोशल मीडिया पर दिखाई देंगे। इस पहल से पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय संस्कृति को भी नई पहचान मिलेगी। संभव है कि अगली वायरल रील किसी कांवरिया पथ से ही निकले।और शायद वही रील अपने क्रिएटर को तीन लाख रुपये का विजेता भी बना दे।

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