
पटना। गयाजी की सूनी बंजर पड़ी पहाड़ियों को अब इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके तहत इन पहाड़ियों पर हरियाली बढ़ाते हुए पर्यटकों को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। पर्यटन विभाग ने इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। विभाग के अनुसार, डुंगेश्वरी, ब्रह्मयोनि, प्रेतशिला, रामशिला, गुरूपा और बराबर जैसी पहाड़ियों पर सीड ब्लॉक तकनीक का उपयोग करते हुए एक लाख से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। यह पौधे वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से लगाई जाएगी।सीड ब्लॉक तकनीक बंजर भूमि पर तेजी से हरियाली विकसित करने की प्रभावी तकनीक है। इसमें कोकोपीट, वर्मी कंपोस्ट और मिट्टी को मिलाकर एक विशेष गाढ़ा मिश्रण तैयार किया जाता है, जिसमें पानी सोखने की अच्छी क्षमता होती है।इस गीली मिट्टी को दबाकर छोटे-छोटे चोकोर (क्यूब) ब्लॉक का रूप दे दिया जाता है। इन ब्लॉक में बने गड्ढों में सीधे बीज डाल दिए जाते हैं। जब तक बीज अंकुरित होकर पौधा बनता है, मिट्टी का यह ब्लॉक ही उसके लिए गमले और पोषक तत्व दोनों का काम करता है।गया की पहाड़ियों के अलावा कैमूर के माता मुंडेश्वरी धाम में भी इको टूरिजम विकसित करने की योजना है। इसके साथ ही इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पूरे प्रदेश में 24 से अधिक स्थलों को विकसित किया जा रहा है। इनमें वन्यजीव अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान, झीलें, जलप्रपात और पहाड़ियां शामिल हैं।




