पटना। राजद तेजस्वी यादव के नेतृत्व मेंं ही बिहार विधानसभा के चुनाव मैदान में उतरेगा। यद्यपि यह पहले से भी लगभग तय-सा ही था, लेकिन शनिवार को प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन के इस प्रस्ताव पर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने अपनी अंतिम मुहर लगा दी। इसके लिए आभार प्रकट करते हुए तेजस्वी ने कहा कि वे पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद के नेतृत्व में राजद को सत्ता तक ले जाने के लिए उत्साही युवा और अनुभवी पुरानी पीढ़ी के साथ तालमेल बनाकर अथक परिश्रम करेंंगे।
तेजस्वी के अब तक के प्रयास की प्रशंसा करते हुए लालू ने आशा जताई कि वे राजद को नई ऊंचाई तक लेकर जाएंगे। इसके बाद अघोषित रूप से यह भी तय हो गया कि चुनाव में महागठबंधन का नेतृत्व तेजस्वी ही करेंगे। पटना में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक का छह वर्षों में यह दूसरा अवसर रहा। हालांकि, इस बार बैठक में अस्वस्थ होने के कारण प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह उपस्थित नहीं रहे।

होटल मोर्या में लगभग 300 प्रतिनिधियों की सर्व-सम्मति से तेजस्वी को एक और अधिकार दिया गया। वह अधिकार पार्टी के संविधान में संशोधन के जरिये मिला। राजद के नाम, झंडा और चुनाव-चिह्न के संदर्भ में किसी भी तरह के निर्णय के लिए लालू के साथ एकमात्र तेजस्वी अधिकारी होंगे। अब तक यह अधिकार पार्टी की चुनाव समिति के पास हुआ करता था। महाराष्ट्र में शिवसेना व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी तथा बिहार में लोक जनशक्ति पार्टी मेंं विघटन के दृष्टिगत राजद ने यह निर्णय लिया है।

उधर, जदयू के प्रदेश प्रवक्ता मनीष यादव ने शनिवार को कहा कि राजद राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक का एकमात्र उद्देश्य परिवारवाद को बढ़ावा देना है। एकमात्र मकसद केवल परिवारवाद का पोषण करना है।

मनीष ने कहा कि राजद की कार्यकारिणी में लालू प्रसाद का राजनीतिक कद को ऊपर करने का काम किया गया। दरअसल यह परिवार की पार्टी है। यहां परिवार के लोगों को ही पद मिलते हैं। दूसरे नेता लालू प्रसाद की कृपा पर ही निर्भर रहते हैं।

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