
रामगढ़ । शहर के विद्यानगर मोहल्ले में सुशीला देवी हत्याकांड मामले का उद्भेदन पुलिस ने कर दिया गया है। पुलिस ने बताया कि सुशीला देवी की हत्या उनकी बहू की बहन और उसके दूसरे पति ने किया है। पुलिस ने प्रेस वार्ता कर बताया कि आर्थिक तंगी और घर से भारी मात्रा में जेवरात और पैसा प्राप्त होने के लोभ हत्या के पीछे का कारण बताया जा रहा है। इसके साथ ही आपसी रंजिश एवं बदले की भावना को लेकर भी योजनाबद्ध तरीके से घटना को अंजाम दिया गया। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।



पुलिस अधीक्षक रामगढ़ डॉ. बिमल कुमार ने 72 घंटे के अंदर मामले का खुलासा कर दिया। उन्होंने कहा कि घटना की संवेदनशीलता एवं गंभीरता को ध्यान में रखते हुए इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया गया। इसके बाद रामगढ़ पुलिस पदाधिकारी परमेश्वर प्रसाद के नेतृत्व में एक एसआईटी टीम का गठन किया गया।
डॉ. बिमल कुमार ने प्राप्त गुप्त सूचना पर तकनीकी एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों का आकलन किया गया। इसके बाद कार्रवाई कर मुख्य साजिशकर्ता कुमारी स्नेहा एवं उनके पति-आरिफ नैयर उर्फ आर्या के अलावे कांड में शामिल एक अभियुक्त अफसर अली को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार अभियुक्तों से पूछताछ के क्रम में अपना-अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। उनकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल चाकू, लूटे गये जेवरात, घटनास्थल तक आने एवं जाने में इस्तेमाल किया गया वाहन, मोबाईल फोन, घटना के समय पहना गया जूता, सीसीटीवी का डीवीआर एवं अन्य सामानों को बरामद किया गया।
अशर्फी प्रसाद के पूरे परिवार को खत्म करने की थी साजिश : कुमारी स्नेहा उर्फ रिंकी और उसके पति आरिफ नैयर उर्फ आर्या रांची जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत हिंदपीढ़ी के रहने वाले हैं। उन लोगों की मंसा सिर्फ सुशीला देवी की हत्या करने के नहीं थी। उनका प्लान अशर्फी प्रसाद के पूरे परिवार को खत्म करना था। उन्हें इस बात की पक्की खबर थी कि रामगढ़ में उसकी बहन विद्या उर्फ तनु के घर पर सास, ससुर और एक नतनी रहते हैं। उन्हें छोटी बच्ची की हत्या करने से भी गुरेज नहीं था। यही वजह थी कि स्नेहा ने लूट और हत्या की वारदात को अंजाम देने के लिए एक बड़ी टीम बनाई। इसमें कुल पांच लोग शामिल थे।
उसके आरिफ ने सबसे पहले उसके घर में पहले काम कर चुके चितरपुर निवासी अफसर अली को इस कांड में शामिल किया। इसके बाद दो अन्य अपराधियों को भी पैसे का प्रलोभन देकर टीम बना ली। उन्हें पता था कि जब वे लूटपाट की घटना को अंजाम देंगे तो लगभग तीन व्यक्ति तो घर में मौजूद रहेंगे ही। उन सभी को मौत के घाट उतारने के लिए उनके पास पर्याप्त लोग रहने चाहिए।
एसपी डॉ बिमल कुमार ने बताया कि अशर्फी प्रसाद के घर में रहने वाले सदस्यों के साथ-साथ उनके यहां काम करने वाली नौकरानी के आने-जाने का समय भी अपराधियों को मालूम था। स्नेहा और आरिफ ने पूरी होमवर्क की थी। वे लोग पिछले कई महीने से अशर्फी प्रसाद के घर की जानकारी जुटा रहे थे। उन्हें पक्का पता चल गया कि नौकरानी सुबह 8:30 बजे घर से निकल जाती है। उसके बाद घर में फिर किसी और का आना जाना नहीं रहता है। इसलिए उन लोगों ने सुबह 9:00 बजे का समय घटना को अंजाम देने के लिए चुना था।
पुलिस की पूछताछ में स्नेहा और आरिफ ने यह बताया कि 29 मई को हत्या करने का पहला प्रयास किया गया था। उस दिन वे लोग अपनी इंडिगो कार जेएच 01 बीयू 4123 से सिकीदरी घाटी होते हुए गोला और चितरपुर के रास्ते रामगढ़ पहुंचे। इस दौरान एक बिना नंबर की स्कूटी पर सवार होकर अफसर अली और दो अन्य अपराधी भी विद्यानगर पहुंचे। उन लोगों ने आसपास निगाहें दौड़ाई और घर का माहौल भी जानने की कोशिश की। लेकिन घर में बच्चों की रोने की आवाज के साथ-साथ कई अन्य लोगों की आवाज भी उन्हें सुनाई दी। इसकी वजह से उन लोगों ने वारदात के समय को बदल दिया। हालांकि उस दिन कई घंटे अशर्फी प्रसाद के घर से थोड़ी दूर पर स्नेहा और आरिफ ने इंतजार किया। लेकिन उनका प्लान उस दिन सफल नहीं हुआ। रामगढ़ से निकलने के बाद वे लोग रांची ना जाकर हत्याकांड में शामिल अफसर अली के घर चितरपुर में ही रुके।
रांची के डोरंडा से खरीदी गई थी तीन चाकू
पूछताछ के दौरान स्नेहा और आरिफ ने पुलिस को बताया कि वे लोग लूटपाट और मर्डर के लिए पूरा प्लान तैयार कर चुके थे। उन्हें उम्मीद थी कि घर में कम से कम तीन लोग होंगे, तो उन्हें मारने के लिए तीन चाकू भी चाहिए। रांची के हिंदपीढ़ी से निकलकर आरिफ डोरंडा इलाके में गया और वहीं से तीन चाकू भी खरीदा था। इसके अलावा वारदात को अंजाम देने के लिए अन्य सामान भी उसने वहीं से जुटाए थे। उन्हें मालूम था कि घर में सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है। इसलिए वे लोग वारदात को अंजाम देने के बाद उसका सीसीटीवी का डीवीआर भी अपने साथ ले गए थे। इस दौरान साक्ष्य को मिटाने के लिए उन लोगों ने घर में आग भी लगा दी थी। लेकिन उनका यह प्लान पूरी तरीके से फेल हो गया।

