
नालंदा। जिले में शराब तस्करों के खिलाफ हुई छापेमारी के दौरान सिपाही अजीत कुमार की मौत के मामले में बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शुरुआत में दावा किया गया था कि शराब माफियाओं ने अंधाधुंध फायरिंग कर सिपाही को मार डाला। हालांकि, अब मामले में नया मोड़ आ गया है बताया जा रहा है कि सिपाही की जान शराब तस्करों की गोली से नहीं, बल्कि साथ चल रहे होमगार्ड जवान की राइफल से गलती से चली गोली से गई थी।
पटना मुख्यालय से आई उत्पाद विभाग की विशेष जांच इकाई (ईआईबी) की टीम दो गाड़ियों में सवार होकर तस्करों का पीछा कर रही थी। इस टीम में एक महिला दारोगा और होमगार्ड जवान शामिल थे। भाग रही गाड़ी को रोकने के लिए एक होमगार्ड जवान ने राइफल से फायर किया। बदकिस्मती से वह गोली तस्करों की गाड़ी में न लगकर आगे चल रही उत्पाद विभाग की ही दूसरी गाड़ी में जा घुसी और सिपाही अजीत कुमार को लग गई। गंभीर हालत में उन्हें विम्स पावापुरी से पटना के PMCH रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
बिना सूचना कार्रवाई पर उठे सवाल : हादसे के बाद खुद को बचाने के लिए पूरी घटना को शराब माफियाओं का हमला बताकर मनगढ़ंत कहानी रची गई। उत्पाद अधीक्षक संजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट किया कि इस पूरी रेड की कोई पूर्व सूचना न तो स्थानीय थाने को दी गई थी और न ही किसी वरिष्ठ अधिकारी को। बिना सक्षम अधिकारी की मौजूदगी के इतनी बड़ी कार्रवाई किसके आदेश पर हुई, अब यह बड़ा सवाल बन गया है।
महिला दारोगा हिरासत में : मामले की जांच आगे बढ़ने पर पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में अधिकारियों और कर्मियों से कड़ी पूछताछ की गई। इस सिलसिले में कार्रवाई करते हुए महिला दारोगा को हिरासत में ले लिया गया है और गोली चलाने वाले होमगार्ड जवान पर भी शिकंजा कसा जा रहा है। पूरे मामले की तह तक जाने, शराब के नेटवर्क और लाइनर की पहचान के लिए SIT गठित कर दी गई है। मामले के तार झारखंड से भी जुड़े हैं, जहां पुलिस टीम छापेमारी कर रही है।

