रांची। जामताड़ा पुलिस ने तकरीबन महीने भर की पड़ताल के बाद छह शातिरों के एक ऐसे साइबर ठग गिरोह को दबोचा है, जो साइबर अपराध के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लेते थे। इन शातिरों ने देशभर के तकरीबन ढाई लाख से भी ज्यादा लोगों को अबतक ठगी का शिकार बनाया है। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि इन शातिरों ने अब तक इन तरीकों से तकरीबन 11 करोड़ की ठगी की है।

ठगी के लिए ये अपराधी पीएम किसान योजना एपीके, पीएम फसल बीमा योजना एपीके, कई बैंकों के एपीके व एनपीसीआई इंटरनेशनल आदि के नाम से फर्जी मोबाइल एपीके बनाकर लोगों के मोबाइल नंबरों पर विभिन्न सोशल साइट्स पर डालकर ठगी का शिकार बनाया है। सभी शातिरों के खिलाफ केस दर्ज करने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया है। इस बात की जानकारी प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जामताड़ा एसपी एहतेशाम वकारिब ने दी। एसपी ने बताया कि काफी दिनों से पुलिस टीम इन शातिरों को दबोचने की फिराक में जुटी थी।

ये शातिर जामताड़ा के नारायणपुर थाना क्षेत्र में एक सुनसान जगह पर साइबर ठगी को अंजाम देने को जुटे थे। पुलिस के हत्थे चढ़े ये मास्टर माइंड अपराधी गिरिडीह के अहिल्यापुर थाना क्षेत्र के बांकीकला गांव का महबूब आलम उर्फ डीके बोस, सफाउद्दीन अंसारी, आरिफ अंसारी उर्फ डीके है। पुलिस ने इसी थाना क्षेत्र के लखनपुर गांव के जसीम अंसारी, गिरिडीह के गांडेय थाना क्षेत्र के महजारी का शेख बेलाल उर्फ डीके और जामताड़ा के करमाटाड़ थाना क्षेत्र के सियाटांड़ का रहने वाला अजय मंडल के भी गिरफ्तार किया है।

ट्रेनी आईपीएस राघवेंद्र शर्मा, डीएसपी चंद्रशेखर और इंस्पेक्टर जयंत तिर्की की अगुवाई में छापेमारी के दौरान इन शातिरों के पास से पुलिस टीम ने 14 मोबाइल, 23 फर्जी आईडी पर लिए गए सिम कार्ड, दो लग्जरी गाड़ियां, एक डीएसएलआर कैमरा, एक ड्रोन कैमरा व 1,08,800 रुपये कैश बरामद किए हैं।

चैट जीपीटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विशेषज्ञ हैं सभी शातिर: पुलिस की जांच में पता चला है कि ये शातिर चैट जीपीटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विशेषज्ञ हैं। इनके मोबाइल से 2700 ठगी के शिकार हो चुके लोगों का डाटा मिला है। साथ ही ठगी के लिए 25 लाख से ज्यादा बार मैसेज आदान-प्रदान करने के साक्ष्य मिले हैं। इनके पास से 2000 पंजाब नेशनल बैंक और 500 कैनरा बैंक खाताधारकों का डेटा भी बरामद हुआ है। पुलिस की टेक्निकल सेल की टीम गहनता से इनकी जांच में जुटी है।

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