
रांची। झारखंड के बहुचर्चित जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती परीक्षा घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कथित अनियमितताओं की नई परतें सामने आ रही हैं। सीआईडी और विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच में परीक्षा के विज्ञापन से लेकर अंतिम चयन और इंटरव्यू तक कथित तौर पर एक समानांतर ‘सेटिंग’ नेटवर्क संचालित होने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां अब कथित वित्तीय लेन-देन, तकनीकी हेरफेर और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।
मामले में ईडी भी वित्तीय पहलू की जांच कर रही है।जांच एजेंसियों के अनुसार, आउटसोर्सिंग एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी की भूमिका जांच के केंद्र में है। सीआईडी ने उसे तीसरी बार तीन दिनों की रिमांड पर लिया है। उसकी पत्नी सुषमा तिवारी और भाई अक्षय तिवारी से भी पूछताछ की जा रही है। जांच में शामिल अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों से पूछताछ में भर्ती प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों के लिए कथित तौर पर रकम तय किए जाने की जानकारी मिली है।
इंटरव्यू और अंतिम चयन में रकम लेने का आरोपजांच में सामने आए बयानों के अनुसार, 11वीं से 14वीं जेपीएससी परीक्षाओं में अंतिम चयन और इंटरव्यू में अंक बढ़ाने के नाम पर कथित तौर पर बड़ी रकम की मांग की गई। 14वीं जेपीएससी परीक्षा के संबंध में सामान्य और पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों से करीब एक करोड़ रुपये तथा अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थियों से करीब 80 लाख रुपये तक लिए जाने का आरोप है।
हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में साक्ष्यों के आधार पर होगी।पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक से पूछताछ में सामने आया ‘दबाव’जेपीएससी की पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता से पूछताछ में भी जांच एजेंसियों को महत्वपूर्ण जानकारी मिलने का दावा किया गया है। उनके कथित बयान के मुताबिक, 11वीं, 13वीं और 14वीं जेपीएससी के विवादित परिणाम तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के निर्देश और दबाव में जारी किए गए थे। हालांकि, उन्होंने तकनीकी स्तर पर किसी तरह की हेरफेर में शामिल होने से इनकार करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की बात कही है।ओएमआर शीट में कथित तकनीकी हेरफेरघोटाले का सबसे अहम पहलू ओएमआर शीट से जुड़ी कथित गड़बड़ी को माना जा रहा है। डेटा प्रोसेसिंग से जुड़े तकनीकी प्रोग्रामर मोहम्मद एबाद के बयानों के आधार पर जांच एजेंसियों को जानकारी मिली है कि कथित तौर पर पहले से चिन्हित अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट में कुछ उत्तरों के गोले खाली छोड़े जाते थे। बाद में आधिकारिक उत्तर कुंजी मिलने के बाद स्कैनिंग और डिजिटल मूल्यांकन के दौरान उन स्थानों पर सही उत्तर दर्ज किए जाने का आरोप है।
जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि चिन्हित अभ्यर्थियों के रोल नंबर तकनीकी टीम तक कैसे पहुंचते थे। सीआईडी मूल ओएमआर शीट, कार्बन कॉपी और डिजिटल डेटा का फॉरेंसिक मिलान कर कथित हेरफेर की पुष्टि करने में जुटी है।जेएसएससी-सीजीएल में 12 लाख रुपये लेने का आरोपजांच एजेंसियों के मुताबिक, जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में भी कथित तौर पर चुनिंदा अभ्यर्थियों से 12-12 लाख रुपये लिए गए। आरोप है कि परीक्षा से पहले उन्हें एक सुरक्षित स्थान पर रखा गया, जहां करीब 65 प्रश्नों के उत्तर याद कराने की बात सामने आई है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि परीक्षा से पहले प्रश्न और उत्तर कथित तौर पर किस माध्यम से बाहर पहुंचे और इसमें परीक्षा संचालन से जुड़े किन लोगों की भूमिका थी।टीडीपीएल की भूमिका जांच के केंद्र मेंपूरे मामले में टीडीपीएल की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है। एजेंसी के डिजिटल रिकॉर्ड, ओएमआर डेटा तक तकनीकी कर्मचारियों की पहुंच और कथित तौर पर उसके दुरुपयोग की पड़ताल जारी है। जांच एजेंसियां आरोपियों के बयानों को डिजिटल साक्ष्य, मूल ओएमआर शीट और कथित वित्तीय लेन-देन से जोड़ने की कोशिश कर रही हैं।
मामले में सीआईडी ने पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने कई भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द, स्थगित और जांच के दायरे में लेने का फैसला किया था। अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कथित बयानों और आरोपों को ठोस दस्तावेजी, फॉरेंसिक और वित्तीय साक्ष्यों से जोड़कर अदालत में साबित करने की है।
