
भुरकुंडा (रामगढ़)। सौंदा डी बचाओ संघर्ष समिति एवं संयुक्त मोर्चा के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को सौंदा डी परियोजना कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन। प्रदर्शन में सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष शामिल हुए और सीसीएल प्रबंधन से सौंदा डी पंचायत की आवासीय कॉलोनी को सुरक्षित रखते हुए खनन कार्य संचालित करने की मांग की। सभा की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष उपेंद्र शर्मा ने की। शर्मा ने कहा कि पहले रहने की व्यवस्था करें, फिर खनन की बात करें प्रबंधन। उन्होंने कहा कि सौंदा डी केवल सीसीएल की आवासीय कॉलोनी नहीं, बल्कि भारत सरकार एवं झारखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पूर्ण ग्राम पंचायत है, जहां करीब 70 वर्षों से हजारों लोग निवास कर रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि पंचायत आदिवासी, दलित और अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र होने के साथ-साथ सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का प्रतीक है। ऐसे में यहां के लोगों के अधिकारों की रक्षा करना सीसीएल प्रबंधन की जिम्मेदारी है। वक्ताओं ने कहा कि यदि पंचायत के अस्तित्व को समाप्त करने का प्रयास किया गया तो ग्रामीण लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को और तेज करेंगे। वक्ताओं ने कहा कि सीसीएल प्रबंधन को जल्द वार्ता कर इस समस्या का समाधान निकालना चाहिए, ताकि प्रबंधन, ट्रेड यूनियनों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच औद्योगिक सौहार्द एवं आपसी विश्वास कायम रह सके।
सभा को वासुदेव साव, रामनरेश सिंह, संजय मिश्रा, संजय वर्मा, संजय शर्मा, अर्जुन सिंह, देवेंद्र सिंह, जेपीएन सिन्हा, अशोक गुप्ता, सुभाष यादव, अशोक शर्मा, दशरथ कुर्मी, जगन्नाथ पासवान, आजाद भुईयां, पंचायत समिति सदस्य कुमकुम देवी, पंसस प्रतिनिधि डब्लू पांडेय, उपमुखिया संजय भारती समेत अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया। प्रदर्शन में सुदेश प्रसाद, सुशील सिंह, दीपक कुमार, राजगिरी चौधरी, उमेश साव, रामवृक्ष भुईयां, गुरुदयाल ठाकुर, राम पुकार, वसीम आलम, प्रवीण नायक, योगेंद्र पांडेय, उमेश रजक, प्रवीर चटर्जी, सुरेश महतो, संतोष रजक, राकेश सिन्हा, अरविंद ओझा, विष्णु राम, रंजीत तुरी, कौशल सिंह, राकेश पासवान, फुलझरी देवी, शाहिद अंसारी, एंजेलिना एक्का, रुदल कुमार, मिथुन, सूरज सहित सैकड़ों महिला-पुरुष उपस्थित थे।
जबरन बेदखली की कोशिश हुई तो आंदोलन और उग्र होगा: सौंदा डी के ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि पुनर्वास से पहले मकान खाली करने का सवाल ही नहीं उठता। प्रदर्शन के दौरान पहले पुनर्वास, फिर खनन और आवासीय कॉलोनी बचाओ के नारों से क्षेत्र गूंज उठा। ग्रामीणों ने कहा कि उनके पूर्वजों को 60-70 वर्ष पहले सीसीएल ने यहां बसाया था और पूरी जिंदगी कंपनी की सेवा में बीत गई। अब बिना वैकल्पिक व्यवस्था के बेघर करना अन्याय है। प्रदर्शनकारियों ने सुझाव दिया कि आवासीय कॉलोनी को सुरक्षित रखते हुए आसपास की खाली जमीन पर खनन कराया जाए। साथ ही चेतावनी दी कि जबरन बेदखली की कोशिश हुई तो आंदोलन और उग्र होगा।
प्रमुख मांगे : समिति ने सीसीएल प्रबंधन के समक्ष कई मांगें रखीं। इनमें आवासीय कॉलोनी को सुरक्षित रखते हुए खनन कार्य करना, पंचायत के वैधानिक अस्तित्व की रक्षा करना, सौंदा डी कॉलोनी में रह रहे सीसीएल कर्मियों को पीसीसी एवं एसीसी की सहमति के बिना अन्य कोलियरियों में क्वार्टर लेने के लिए बाध्य नहीं करना, परियोजना कार्यालय, जीवीटीसी एवं सब-स्टेशन को यथावत रखना तथा प्रस्तावित माइन प्लान की लिखित जानकारी संघर्ष समिति एवं संयुक्त मोर्चा को उपलब्ध कराना शामिल है।
