
पटना। राजधानी के बापू सभागार में आयोजित लव-कुश सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के विकास के लिए एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित भारत और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समृद्ध बिहार की परिकल्पना की है। बिहार को आगे बढ़ाने के लिए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है। समारोह में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, मंत्री शीला मंडल समेत अन्य लोग मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने लव-कुश समाज की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख किया।



उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि ‘हम एक हैं तो सेफ हैं, बंटेंगे तो कटेंगे’. इसके कुछ देर बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एनडीए के पांच दलों को ‘पांच पांडव’ बताते हुए 2010, 2020 और 2025 के चुनावी आंकड़ों से एकता का मतलब समझाया। उन्होंने याद दिलाया कि 2010 में जब सब मिलकर लड़े, तो जनता ने 206 सीटें झोली में डाल दी थीं। 2020 में रास्ते अलग हुए, तो आंकड़ा सीधे 127 पर सिमट गया। इन्हीं नतीजों का हवाला देते हुए उन्होंने बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी (रामविलास), आरएलएम और हम की तुलना ‘पांच पांडवों’ से की. उनका सीधा संदेश यही था कि सबकी भूमिका भले अलग हो, लेकिन एकजुट रहने की ताकत चुनावी नतीजों में साफ नजर आती है।
मुख्यमंत्री ने लव-कुश की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि जब माता सीता के त्याग को लेकर स्थिति बनी, तब लव-कुश ने अपनी मां के सम्मान के लिए भगवान श्रीराम के समक्ष भी खड़े होने का साहस दिखाया। जब माता सीता को लगा कि पिता और पुत्र के बीच युद्ध नहीं होना चाहिए तो उन्होंने स्वयं हस्तक्षेप कर युद्ध रोक दिया।उन्होंने कहा कि हम उस परंपरा के वंशज हैं, जहां मर्यादा की स्थापना के लिए भगवान श्रीराम ने 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया। लव-कुश समाज 1994 में भी एकजुट था और 2026 में भी एक है। समाज किसी के खिलाफ नहीं है। इसका उद्देश्य न्याय के साथ आगे बढ़ना और गौरवशाली इतिहास को कायम रखना है।
2005 के बाद बिहार में बदली विकास की दिशा : सम्राट चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार को विकास का रास्ता दिखाया। उनके अनुसार राज्य की अर्थव्यवस्था और आधारभूत संरचना में बदलाव आया है। अपने राजनीतिक अनुभव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 1999 में पहली बार सरकार में आने के समय बिहार के बजट की स्थिति को उन्होंने करीब से देखा था। तब राज्य का बजट करीब छह हजार करोड़ रुपये था, जिसमें लगभग दो हजार करोड़ रुपये रायल्टी के रूप में चले जाते थे। उन्होंने बिहार-झारखंड विभाजन का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय बिहार के बंटवारे को लेकर सभी की आंखों में आंसू थे। उन्होंने दावा किया कि बिहार की आय का बड़ा हिस्सा झारखंड क्षेत्र से आता था। 2005 के बाद स्थिति बदली और वर्ष 2024 में बिहार का बजट 3.17 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

