
नयी दिल्ली। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) की पहली महिला टीम ने माउंट एवरेस्ट (8,848 मीटर) फतह कर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। आईटीबीपी के अनुसार 14 सदस्यीय दल में 11 महिला पर्वतारोही और तीन तकनीकी एवं सहयोगी सदस्य शामिल थे। टीम ने नेपाल की ओर से साउथ कोल रूट के जरिए 21 मई को माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी की। पहली टीम ने रात 12:52 बजे शिखर पर पहुंचकर सफलता हासिल की, जबकि बाद में सभी 11 महिला पर्वतारोही एवरेस्ट के शिखर तक पहुंचने में सफल रहीं। आईटीबीपी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस उपलब्धि को भारत के लिए गर्व का क्षण बताया। बल ने अपने पोस्ट में कहा कि माउंट एवरेस्ट पर इतिहास रचा गया।



आईटीबीपी की पहली महिला टीम ने 21 मई को साउथ कोल रूट के जरिए माउंट एवरेस्ट (8,848 मीटर) फतह किया। सुबह 6:52 बजे पहली सफलता मिली और सभी 11 महिला पर्वतारोही शिखर तक पहुंचीं। यह भारत के लिए गर्व का पल है। यह अभियान 19 अप्रैल को आईटीबीपी मुख्यालय से रवाना किया गया था। बल के मुताबिक पर्वतारोहियों ने बेहद खराब मौसम, आॅक्सीजन की कमी और 8,000 मीटर से ऊपर स्थित डेथ जोन जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए अदम्य साहस, धैर्य और बेहतरीन टीमवर्क का परिचय दिया।
इस उपलब्धि के साथ आईटीबीपी अब तक कुल 232 पर्वतारोहण अभियानों को सफलतापूर्वक पूरा कर चुका है, जिनमें पांच बार माउंट एवरेस्ट फतह शामिल है। इसके अलावा बल दुनिया की 8,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली 14 चोटियों में से छह प्रमुख चोटियों एवरेस्ट, कंचनजंगा, मकालू, ल्होत्से, धौलागिरी और मनास्लू पर सफलता हासिल कर चुका है।
बीएसएफ की टीम ने वंदे मातरम गाया : बीएसएफ के इस अभियान में कांस्टेबल कौसर फातिमा (लद्दाख), कांस्टेबल मुनमुन घोष (पश्चिम बंगाल), कांस्टेबल रेबेका सिंह (उत्तराखंड) और कांस्टेबल त्सेरिंग चोरोल (कारगिल) शामिल थीं। बीएसएफ ने कहा कि दुनिया की सबसे ऊंची चोटी को अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प के साथ फतह करते हुए बीएसएफ की पहली महिला टीम ने मिशन वंदे मातरम् के तहत इतिहास रच दिया। बल के अनुसार महिला पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट शिखर पर पहुंचकर वंदे मातरम गाया।

