रांची। दिशोम गुरु शिबू सोरेन के संघर्षों में पत्नी रूपी सोरेन बराबर की भागीदार थीं। जब जल, जंगल, जमीन की लड़ाई तथा झारखंड आंदोलन में गुरुजी जंगलों और पहाड़ों की खाक छानते थे तो रूपी सोरेन ही थीं जो अपने परिवार को संभालती थीं। अपने बाल-बच्चों को न केवल भरण-पोषण किया, बल्कि उन्हें अच्छी शिक्षा और संस्कार भी दिलाई। झारखंड आंदोलन के दौरान कई बार गुरुजी को भूमिगत भी होना पड़ा था। कई बार जेल भी गए। ऐसी परिस्थितियों में भी रूपी सोरेन ही थीं, जो अपने परिवार के पूरे कुनबे को संभालती थीं। तीन बेटों और एक बेटी की परवरिश ऐसी परिस्थितियों में आसान नहीं थी। कह सकते हैं कि झारखंड आंदोलन में अप्रत्यक्ष रूप से उनकी भी भूमिका रही।

रूपी सोरेन का शिबू सोरेन से एक जनवरी 1962 को विवाह हुआ था। इसके बाद शिबू सोरेन के लंबे राजनीतिक संघर्ष और झारखंड आंदोलन से जुड़े सफर के दौरान रूपी सोरेन परिवार की जिम्मेदारियों से जुड़ी रहीं। उनका बड़ा बेटा दुर्गा सोरेन थे जो झामुमो के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे। जामा से विधायक रहे दुर्गा का निधन वर्ष 2009 में हो गया था। यह उनके लिए सबसे बड़ा आघात था। लोग कहते हैं कि तब से ही रूपी कुछ अस्वस्थ रहने लगी थीं। उनके बेटे हेमंत सोरेन वर्तमान में झारखंड के मुख्यमंत्री हैं। छोटे बेटे बसंत सोरेन दुमका से विधायक हैं। बेटी अंजनी सोरेन भी झामुमो से जुड़ी रही हैं और ओडिशा में सक्रिय हैं।

1,999 में लड़ा था लोकसभा चुनाव : रूपी सोरेन ने वर्ष 1,999 में दुमका से लोकसभा चुनाव भी लड़ा था। झामुमो के तत्कालीन सुप्रीमो शिबू सोरेन ने अपनी पत्नी रूपी सोरेन को उस वक्त चुनाव मैदान में उतारा, जब वे खुद राज्यसभा सदस्य थे। हालांकि, रूपी सोरेन तब भाजपा के उम्मीदवार बाबूलाल मांडी से चुनाव हार गई थीं। रूपी को 36.02 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि बाबूलाल को 36.87 प्रतिशत। वोट का अंतर महज 4,648 रहा था।

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