
नई दिल्ली। लोकसभा में गुरुवार को सरकार की ओर से परिसीमन और उसके बाद महिला आरक्षण लागू कराने से जुड़े तीनों विधेयकों को पेश किया गया। विपक्ष विधेयकों को लाए जाने का ही विरोध करता रहा। गृहमंत्री शाह ने कहा कि विपक्ष इनपर चर्चा होने दे और सरकार हर आपत्ति का जवाब देगी। साथ ही मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण का मुद्दा आने पर शाह ने कहा कि धर्म के नाम पर आरक्षण किसी भी तरह से मंजूर नहीं है।
लोकसभा में गुरुवार को विपक्ष ने सरकार की ओर से परिसीमन और उसके बाद महिला आरक्षण लागू कराने से जुड़े तीनों विधेयकों को विचार हेतु प्रस्तुत किए जाने का कड़ा विरोध कर दिया और इसपर बकायदा मतविभाजन हुआ। लोकसभा अध्यक्ष सहित केन्द्रीय गृहमंत्री और संसदीय कार्यमंत्री ने विपक्ष की आपत्तियों को खारिज किया।
सरकार और लोकसभा अध्यक्ष ने बार-बार कहा कि विधेयकों को पेश किए जाने का सदस्य, संविधान और सदन की विधायी क्षमता के आधार पर विरोध कर सकते हैं। कांग्रेस, सपा, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक सहित विपक्षी पार्टियों ने विधेयकों पर अपनी आपत्ति जाहिर की। उनका कहना था कि सरकार महिला आरक्षण की आड़ में असल में परिसीमन विधेयक लाई है। असम व जम्मू-कश्मीर की तरह इनके माध्यम से सरकार संविधानिक संरक्षण को समाप्त कर मनमाने ढंग से परिसीमन करना चाहती है। विधेयक को विचार हेतु लाने का विरोध करने पर गृहमंत्री अमित शाह को बार-बार उठना पड़ा।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार विधेयकों को जल्दबाजी में लाई है और सरकार नवीनतम जनगणना आंकड़ों से बचना चाहती है। इसमें सरकार को जातिगत जनसंख्या बतानी होगी और विपक्ष आरक्षण मांगेगा । अमित शाह ने अखिलेश के बयान को चिंताजनक बताया और कहा कि जनगणना जारी है। जातिगत जनगणना कराने का भी फैसला सरकार ले चुकी है। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण दिए जाने को गैर संवैधानिक बताया और कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण का सवाल ही नहीं पैदा होता। इसपर अखिलेश ने आधी आबादी में मुस्लिम महिलाओं के होने की बात कही। वहीं, शाह ने कहा कि सपा चाहे तो सभी महिला आरक्षित सीट मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है। इसमें उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
