नई दिल्ली। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर ने पर्दे पर कई यादगार किरदार निभाए, लेकिन सैनिक की भूमिका को उन्होंने सिर्फ अभिनय तक सीमित नहीं रखा। फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ में मेजर प्रताप चौहान का किरदार निभाने के लिए उन्होंने भारतीय सेना के साथ कठिन सैन्य प्रशिक्षण लिया और सैनिकों के अनुशासन तथा जीवनशैली को करीब से समझा।

साल 1991 में रिलीज हुई फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ नाना पाटेकर के करियर की खास फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में उन्होंने अभिनय के साथ निर्देशन भी किया था। मेजर प्रताप चौहान के किरदार को वास्तविक रूप देने के लिए उन्होंने मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ सैन्य प्रशिक्षण लिया। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने करीब तीन साल तक मिलिट्री ट्रेनिंग की, ताकि उनके किरदार में सैनिकों जैसा अनुशासन, कठोरता और आत्मविश्वास नजर आए।

टेरिटोरियल आर्मी से भी जुड़े

‘प्रहार’ के दौरान सेना से उनका जुड़ाव इतना गहरा हुआ कि बाद में नाना पाटेकर टेरिटोरियल आर्मी से भी जुड़े। सेना के प्रति उनका यह लगाव उस समय और चर्चा में आया, जब 1999 में कारगिल युद्ध शुरू हुआ।

कारगिल युद्ध के दौरान नाना ने सेना के जवानों के बीच जाकर उनका हौसला बढ़ाने की इच्छा जताई। इसके लिए उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से विशेष अनुमति मांगी। बताया जाता है कि शुरुआत में उन्हें अनुमति नहीं मिली, लेकिन उनकी सैन्य ट्रेनिंग और अनुभव को देखते हुए बाद में उन्हें जवानों के साथ जाने की अनुमति दी गई।

रिपोर्टों के अनुसार, नाना करीब दो महीने तक सेना के जवानों के साथ रहे और क्विक रिएक्शन टीम का हिस्सा बने। युद्ध क्षेत्र और एलओसी के आसपास बिताया गया यह समय उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण और जीवन बदल देने वाला अनुभव रहा।

कारगिल का अनुभव बताया था जीवन बदलने वाला

एक इंटरव्यू में नाना पाटेकर ने कारगिल के अनुभव को याद करते हुए बताया था कि जब वह श्रीनगर पहुंचे थे, तब उनका वजन करीब 76 किलोग्राम था, जबकि लौटने तक यह घटकर लगभग 56 किलोग्राम रह गया था। जवानों के साथ रहकर उन्होंने युद्ध की परिस्थितियों और सैनिकों के जीवन को बेहद करीब से देखा।

नाना पाटेकर के निधन के बाद उनके अभिनय और सेना से जुड़ाव को याद किया जा रहा है। पूर्व सेना प्रमुख और मिजोरम के राज्यपाल जनरल वी.के. सिंह ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

उन्होंने ‘प्रहार’ की शूटिंग के दौरान नाना को करीब से देखने का उल्लेख करते हुए कहा कि नाना न केवल बेहतरीन अभिनेता थे, बल्कि बेहद प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी भी थे। वी.के. सिंह के मुताबिक, नाना अपनी हर भूमिका में पूरी तरह ढलने के लिए कड़ी मेहनत करते थे और उनका समर्पण तथा काम के प्रति गंभीर रवैया उनके अभिनय में वास्तविकता लेकर आता था।

नाना पाटेकर की दमदार आवाज, संवाद अदायगी और अभिनय की अलग शैली ने उन्हें हिंदी सिनेमा में एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उनके निभाए किरदार और फिल्मों में उनका योगदान लंबे समय तक दर्शकों की यादों में बना रहेगा।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version