नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भारत को ज्ञान की वैश्विक महाशक्ति बनाने के लिए नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति ( एनईपी) में जो परिकल्पना की गई है, उसके लिए जरूरी है कि हमारे शिक्षकों की पहचान भी विश्व के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों के रूप में हो। शिक्षण संस्थानों और शिक्षकों को इसके लिए बढ़-चढ़कर योगदान देना है। इस दिशा में हम आगे बढ़ रहे है लेकिन अभी बहुत आगे जाना है।

उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि शिक्षकों के निर्णायक योगदान से भारत आने वाले दिनों में ज्ञान की वैश्विक महाशक्ति के रूप में प्रतिष्ठित होगा। राष्ट्रपति मुर्मु ने शुक्रवार को शिक्षक दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। इस मौके पर उन्होंने शिक्षण के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले 81 शिक्षकों को भी पुरस्कृत किया। इनमें स्कूली शिक्षा के 45, उच्च शिक्षा के 21 और कौशल विकास से जुड़े 15 शिक्षक शामिल थे।

इस मौके पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सहित शिक्षा मंत्रालय से जुड़े राज्य मंत्री और अधिकारी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि स्मार्ट ब्लैकबोर्ड, स्मार्ट क्लासरूम व दूसरी आधुनिक सुविधाओं का अपना महत्व है लेकिन स्मार्ट शिक्षक भी जरूरी है। स्मार्ट शिक्षक वैसे शिक्षक होते हैं जो अपने विद्यार्थियों के विकास से जुड़ी जरूरतों को ठीक से समझते हैं। स्नेह व संवेदनशीलता के साथ अध्ययन की प्रक्रिया को रोचक और प्रभावी बनाते हैं।

राष्ट्रपति ने इस मौके पर विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण की जरूरत पर जोर दिया और शिक्षकों से कहा यह उनका मुख्य कर्तव्य है। नैतिक आचरण करने वाले संवेदनशील और कर्तव्यनिष्ठ विद्यार्थी उन विद्यार्थियों से बेहतर होते है, जो प्रतिस्पर्धा, किताबी ज्ञान और स्वार्थ के लिए ही तत्पर रहते है।

बेटियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें सरकारें: बेटियों की अच्छी शिक्षा देने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ ही राष्ट्रपति मुर्मु ने बेटियों की सुविधाओं और सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखने पर जोर दिया। केंद्र, राज्य सरकारों, विद्यालयों के प्रबंधकों व शिक्षकों से कहा कि वे बेटियों की सुविधाओं और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। शिक्षकों से कहा कि बालिकाएं प्राय: संकोची होती है ऐसे में वह उन पर और कम सुविधा सम्पन्न पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चों पर अधिक ध्यान दें।

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