
लखनऊ । उत्तर प्रदेश की रामनगरी अयोध्या शनिवार को दीपोत्सव के दसवें संस्करण में 30 लाख से अधिक दीपों की रोशनी से जगमगा उठी। राम की पैड़ी सहित सरयू नदी के तट पर स्थित 56 घाटों पर एक साथ प्रज्ज्वलित दीपों ने भव्य दृश्य प्रस्तुत किया। इस अवसर पर 2,100 ड्रोन से रामायण प्रसंगों पर आधारित शो, लेजर प्रदर्शन, प्रोजेक्शन मैपिंग और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान किया।




समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहे ।समारोह के मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अपने संबोधन में भगवान श्रीराम के आदर्शों और अयोध्या की पौराणिक महत्ता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन सिखाता है कि वास्तविक महानता सत्ता या पद में नहीं, बल्कि चरित्र बल और कर्तव्यों के प्रति अटूट निष्ठा में होती है।

उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कर्मयोगी बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा की। उन्होंने मुख्यमंत्री को ‘हिंदू हृदय सम्राट’ संबोधित करते हुए संसद में उनके साथ बिताए पुराने दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री उस समय भी अपने भाषणों में ओजस्वी थे । रामचरितमानस की चौपाई ‘प्रथम तिलक वसिष्ठ मुनि कीन्हा, पुनि सब विप्रन्ह आयसु दीन्हा…’ की परंपरा के अनुरूप उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रभु श्रीराम का तिलक कर राज्याभिषेक किया। इस अलौकिक क्षण के साक्षी बने संत-महंतों और श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के उद्घोष से वातावरण गुंजायमान कर दिया।
योगी ने खींचा भगवान राम का रथ :
अयोध्या में प्रतीकात्मक रूप से प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण रथ पर सवार हुए तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और जनप्रतिनिधियों ने स्वयं रामरथ खींचा। रथ को रामकथा पार्क स्थित भव्य रामदरबार के मंच तक लाया गया।

