
मास्को । राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समर्थन वाली युनाइटेड रशिया पार्टी एक बार फिर अच्छे खासे मतों के अंतर से जीत की कगार पर खड़ी है। वो जीत चुकी है हालांकि आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। रूसी न्यूज एजेंसी टीएएसएस ने केंद्रीय निर्वाचन आयोग के डाटा का हवाला देते हुए बताया कि युनाइटेड रशिया पार्टी को ड्यूमा चुनाव में 57.86 फीसदी वोट मिले हैं। अब तक 90.43 फीसदी बैलट काउंट किया जा चुका है। दूसरे नंबर पर सीआरपीएफ है जिसे 13.84 प्रतिशत तो तीसरे पर एलडीपीआर को 8.9 फीसदी मत मिले हैं। न्यू पीपल को 7.94 और ए जस्ट रशिया को 4.95 फीसदी मत मिले हैं।



यह फरवरी 2022 में यूक्रेन के साथ शुरू हुए संघर्ष के बाद पहला संसदीय चुनाव है। पुतिन ने चुनाव को यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों के समर्थन से जोड़कर पेश किया था। 2021 के पिछले संसदीय चुनाव में यूनाइटेड रशिया ने स्टेट ड्यूमा 450 में से 324 सीटों पर कब्जा किया था।
स्टेट ड्यूमा (जैसे भारत में लोकसभा) रूस की संसद का निचला सदन है। इसमें कुल 450 सीटें हैं। इनमें 225 सीटें पार्टी को मिले वोट और 225 सीटें अलग-अलग क्षेत्रों में सीधे चुनाव से तय होते हैं। इसमें देश के कानून बनाए जाते हैं और पुराने कानूनों में बदलाव किया जाता है। कानून पर संसद सदस्य चर्चा करते हैं और फिर मत के जरिए फैसला होता है।
इन चुनावों में युद्ध-विरोधी पार्टी याब्लोको को इस बार चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था। हालांकि, पार्टी के कई नेताओं को कुछ सीटों से चुनाव लड़ने की इजाजत दे दी गई थी। कथित तौर पर कई सरकार विरोधी नेताओं और उम्मीदवारों को भी चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला। रूस में इस चुनाव में 56.66 फीसदी लोगों ने वोट डाला। मास्को में मतदान रिकॉर्ड स्तर पर रहा। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूनाइटेड रशिया पार्टी के सदस्य नहीं हैं। हालांकि, वे 2008 से 2012 तक इसके अध्यक्ष जरूर रहे हैं। उस समय भी वे पार्टी के औपचारिक सदस्य नहीं थे।
पार्टी नियमों के मुताबिक, अध्यक्ष होने के लिए सदस्यता अनिवार्य नहीं है। 2012 में पुतिन ने पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ दिया था। इसके बाद दिमित्री मेदवेदेव को कमान सौंपी गई। ये चुनाव यूक्रेन के ड्रोन हमलों के बीच संपन्न हुए। रूस में संसदीय चुनाव के आखिरी दिन रविवार को यूक्रेन ने मास्को और आसपास के इलाकों में कथित तौर पर 1,600 से ज्यादा ड्रोन भेजे। मास्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने दावा किया कि राजधानी को निशाना बनाकर 450 ड्रोन भेजे गए थे।

