नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने बुधवार को कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची का शुद्ध और अद्यतन होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह बात बुधवार को भारत मंडपम में आयोजित लोकतांत्रिक देशों के निर्वाचन निकायों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में कही।

चुनाव आयोग की ओर से अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र और निर्वाचन प्रबंधन सम्मेलन (आईआईसीडीईएम 2026) का शुभारंभ किया गया। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सीईसी ने भारत की चुनाव व्यवस्था की सफलता साझा की। उन्होंने बताया कि हाल ही में बिहार में कराए गए विधानसभा चुनाव के दौरान लगभग साढ़े सात करोड़ मतदाताओं की सूची का व्यापक स्तर पर अद्यतन किया गया, जिसके खिलाफ एक भी अपील दर्ज नहीं हुई। साथ ही करीब एक लाख मतदान केंद्रों पर शांतिपूर्ण मतदान हुआ और कहीं भी पुनर्मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है, जिसकी परंपरा 600 ईसा पूर्व तक जाती है। उन्होंने अशोक स्तंभ और अथर्ववेद के संस्कृत मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राचीन ग्राम सभाएं और समितियां भारत की सुदृढ़ लोकतांत्रिक सोच को दशार्ती हैं।

इससे पहले एक स्वागत समारोह में सीईसी ज्ञानेश कुमार ने निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधु और डॉ. विवेक जोशी के साथ लगभग 60 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का स्वागत किया। सम्मेलन में करीब एक हजार प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 42 निर्वाचन प्रबंधन निकायों के प्रतिनिधि, 27 देशों के राजदूत व उच्चायुक्त, 70 से अधिक राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञ, भारत निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारी और देशभर से आए 36 मुख्य निर्वाचन अधिकारी शामिल हैं।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधु ने कहा कि हर चुनाव के केंद्र में नागरिक का विश्वास होता है और उसकी रक्षा करना निर्वाचन निकायों की सामूहिक जिम्मेदारी है। वहीं, निर्वाचन आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने कहा कि आईआईसीडीईएमझ्र2026 चुनावों को विभिन्न दृष्टिकोणों से समझने का महत्वपूर्ण मंच है।

सम्मेलन में आगामी डॉक्यूसीरीज इंडिया डिसाइड्स की झलक भी दिखाई गई, जो भारत की विशाल और जटिल चुनावी प्रक्रिया को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है।

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