नई दिल्ली। देश में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को वीडियो संदेश जारी कर घोषणा की कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की परीक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा के लिए इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में छह सदस्यीय हाई पावर टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल पेपर लीक के दोषियों को सजा देना नहीं, बल्कि ऐसी मजबूत परीक्षा प्रणाली विकसित करना है, जिस पर देश का हर विद्यार्थी बिना किसी संदेह के भरोसा कर सके। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित सुधारों के माध्यम से भविष्य में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाने की दिशा में काम किया जाएगा।

सरकार परीक्षा प्रणाली को कानूनी रूप से और अधिक मजबूत बनाने की तैयारी भी कर रही है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह सोमवार को संसद में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों के रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 पेश करेंगे। सरकार का दावा है कि नए प्रावधानों से पेपर लीक, संगठित नकल और परीक्षा में धांधली जैसे अपराधों पर कड़ी कार्रवाई संभव होगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले कई आरोपी पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं और मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था भी की गई है। उन्होंने कहा कि टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर आगामी परीक्षाओं में आवश्यक सुधार लागू किए जाएंगे।

यह घोषणा एनटीए में हाल ही में किए गए प्रशासनिक बदलावों के बाद आई है। केंद्र सरकार पहले ही शिक्षा मंत्रालय में बदलाव करते हुए धर्मेंद्र प्रधान के स्थान पर प्रल्हाद जोशी को जिम्मेदारी सौंप चुकी है। अब परीक्षा सुधारों के लिए शीर्ष विशेषज्ञों को जिम्मेदारी देकर सरकार दीर्घकालिक सुधारों की दिशा में आगे बढ़ रही है।

नंदन नीलेकणि को बड़े पैमाने की डिजिटल परियोजनाओं का व्यापक अनुभव है। वह इंफोसिस के सह-संस्थापक होने के साथ भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के पहले अध्यक्ष भी रह चुके हैं और आधार परियोजना का सफल नेतृत्व कर चुके हैं।

छह सदस्यीय होगी टास्क फोर्स

नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली इस हाई पावर टास्क फोर्स में इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, आईबी के पूर्व निदेशक तपन डेका, आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व केंद्रीय शिक्षा सचिव अनीता करवाल और प्रशासनिक एवं लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा सदस्य होंगे। समिति एनटीए की परीक्षा प्रणाली की तकनीकी एवं संरचनात्मक समीक्षा कर पारदर्शिता बढ़ाने तथा पेपर लीक जैसी घटनाओं की रोकथाम के लिए दीर्घकालिक सुधारों की सिफारिश करेगी।

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