
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि जब 40 करोड़ देशवासी गुलामी की जंजीरों को तोड़कर देश को आजाद कर सकते हैं तो आज 140 करोड़ परिवारजन इसी भाव से समृद्ध भारत भी बना सकते हैं। 78वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से देशवासियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत 2047′ सिर्फ भाषण के शब्द नहीं हैं बल्कि इसके पीछे कठोर परिश्रम जारी है और देश के सामन्य जन से सुझाव लिए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हम 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं। अगर 40 करोड़ देशवासी अपने पुरुषार्थ, समर्पण, त्याग और बलिदान से आजादी दिला सकते हैं, आजाद भारत बना सकते हैं तो 140 करोड़ देशवासी इसी भाव से समृद्ध भारत भी बना सकते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज यह समय है देश के लिए जीने की प्रतिबद्धता का और अगर देश के लिए मरने की प्रतिबद्धता आजादी दिला सकती है तो देश के लिए जीने की प्रतिबद्धता समृद्ध भारत भी बना सकती है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 सिर्फ भाषण के शब्द नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे कठोर परिश्रम चल रहा है। देश के कोटि-कोटि जनों के सुझाव लिए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि देश के करोड़ों नागरिकों ने विकसित भारत के लिए अनगिनत सुझाव दिए हैं और इसमें हर देशवासी का सपना उसमें प्रतिबिंबित हो रहा है, हर देशवासी का संकल्प झलकता है। उन्होंने कहा कि किसी ने भारत को दुनिया का स्किल कैपिटल बनाने का सुझाव दिया तो किसी ने भारत को विनिर्माण के क्षेत्र में दुनिया का केंद्र बनाने का और किसी ने यहां के विश्वविद्यालयों को वैश्विक बनाने का सुझाव दिया।
मोदी ने कहा कि किसी ने बढ़ती हुई प्राकृतिक आपदाओं के बीच शासन प्रशासन में क्षमता निर्माण का सुझाव दिया तो बहुत सारे लोगों ने यह सपना भी देखा है कि अंतरिक्ष में भारत का स्पेस स्टेशन जल्द से जल्द बनना चाहिए। प्रधानमंत्री ने लाल किले पर तिरंगा फहराने से पहले राजघाट जा कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। लाल किला पहुंचने पर प्रधानमंत्री का स्वागत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने ने किया।
हम बड़े सुधारों के लिए प्रतिबद्ध, हमारा संकल्प राष्ट्रहित सर्वोपरि का है।
मोदी ने कहा कि उनके नेतृत्व वाली सरकार देश में बड़े सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है और वह राजनीतिक गुणा-भाग से नहीं, बल्कि राष्ट्रहित सर्वोपरि के संकल्प के साथ कदम उठाती है। उन्होंने 78वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में पिछले 10 वर्षों के दौरान उठाए गए कदमों तथा प्रमुख योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने यथास्थिति वाली मानसिकता को खत्म किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह देश आजादी के बाद उन परिस्थितियों में दशकों तक रहा, जब यह कहा जाता था कि होता है, चलता है। देश में यथास्थिति का एक माहौल बन गया था। लोग कहते थे कि कुछ होने वाला नहीं है। हमें इस मानसिकता को तोड़ना था और हमने तोड़ा ।
मोदी ने कहा कि देश का सामान्य नागरिक बदलाव चाहता था। हमने बड़े सुधार किए हैं। सुधारों को लेकर हमारी प्रतिबद्धता चार दिन की वाहवाही के लिए नहीं है, किसी मजबूरी में नहीं है बल्कि देश को मजबूती देने के इरादे से है।ह्ण
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हम जो कुछ भी करते हैं वह राजनीतिक गुण-भाग के बारे में सोचकर नहीं करतेङ्घ. ह्यराष्ट्र हित सर्वोपरि, हमारा राष्ट्र महान बने, हम इस संकल्प को लेकर कदम उठाते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने शासन के मॉडल को बदला है। आज सरकार लाभार्थी के घर खुद पहुंचती है।
