
धनबाद। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि मूलवासियों के साथ-साथ जो लोग बाहर से आकर यहां बसे हैं, वे भी स्वयं को झारखंडी कहने में गर्व महसूस करते हैं। सोरेन ने कहा कि जन्म देने वाली मां से पालन करने वाली मां का दर्जा बड़ा होता है। मुख्यमंत्री बुधवार को धनबाद में झामुमो के 54वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। गौरतलब है कि 4 फरवरी 1973 को धनबाद में ही झामुमो की स्थापना हुई थी।
लंदन में लोग बोल रहे जोहार : उन्होंने कहा, जोहार (संथाली में नमस्कार) सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं है, पूरे देश में इस अभिवादन को सम्मान और समर्थन मिला है। लंदन में भी लोग ह्यजोहारह्ण बोल रहे हैं। हम अपने कार्यकतार्ओं के लिए हर मौसम, हर चुनौती और हर परिस्थिति में तैयार हैं।
सोरेन ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों ने लंबी लड़ाई लड़ी। कई ऐसे नेता थे जिन्होंने रास्ता दिखाया, लेकिन वे आज हमारे बीच नहीं हैं। उन्होंने दिशोम गुरु शिबू सोरेन को याद करते हुए कहा कि उनकी पहचान देश और दुनिया में आदिवासी, दलित और मजदूरों के नेता के रूप में रही है। उन्होंने कहा, यह सिर्फ स्थापना दिवस नहीं है, बल्कि गुरुजी के नहीं रहने का दिन भी है। यह राज्य को सजाने-संवारने और उनके सपनों को पूरा करने का संकल्प दिवस है। मालूम हो कि झामुमो के संस्थापक शिबू सोरेन अब हमारे बीच नहीं हैं। पिछले साल 4 अगस्त, 2025 को उनका निधन हो गया था।
गोल्फ ग्राउंड के ऐतिहासिक महत्व का जिक्र करते हुए सोरेन ने कहा कि इस धरती ने कई ऐसे नेतृत्व दिए, जिन्होंने दमनकारियों के सामने सीना तानकर बलिदान दिया। भगवान बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, बिनोद बिहारी महतो और ए.के. राय जैसे महान नेताओं का यह राज्य है। इनके बलिदान और समर्पण ने झारखंड को अलग पहचान दी है।
