
न्यूयॉर्क/वाशिंगटन । ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद, अमेरिका के भीतर एक नया राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। शनिवार रात वाशिंगटन डीसी, न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर और दर्जनों अन्य शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। वे राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ईरान पर किए गए हमलों को “अवैध और असंवैधानिक” बता रहे हैं। अमेरिका में ‘एंटी-वार’ प्रदर्शनों की लहर : प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने कांग्रेस की अनुमति के बिना ईरान पर हमला करके अमेरिकी संविधान का उल्लंघन किया है। “ईरान पर युद्ध रोको” और “हमे एक और अंतहीन युद्ध नहीं चाहिए।”
प्रदर्शनकारियों का तर्क : न्यूयॉर्क में प्रदर्शन कर रही क्रिस्टीना पेरेज़ ने कहा, “यह सरासर तानाशाही है। हमारे पास अपने देश की समस्याओं के लिए पैसा नहीं है, लेकिन युद्ध के लिए हमेशा पैसा होता है।”
कांग्रेस की अनदेखी : प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ट्रंप ने बिना किसी ठोस कारण या कानूनी मंजूरी के एक संप्रभु राष्ट्र के नेता की हत्या की है, जो भविष्य के लिए खतरनाक मिसाल है।
संगठनों का गठबंधन और इमरजेंसी प्रोटेस्ट : इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कई बड़े संगठनों के गठबंधन ने किया है, जिनमें ANSWER Coalition, कोडपिंक (CodePink) और डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका (DSA) शामिल हैं। शनिवार को अटलांटा, शिकागो, मियामी और लॉस एंजिल्स जैसे शहरों में प्रदर्शन हुए। रविवार को अल्बानी और स्प्रिंगफील्ड जैसे छोटे शहरों में भी बड़े विरोध प्रदर्शनों की तैयारी है।
रिजाइम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) की कोशिश पर सवाल : न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोह्रान मदनी ने इस हमले को “आक्रामक युद्ध का विनाशकारी विस्तार” बताया है। आलोचकों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी की तरह अब ईरान में भी ज़बरदस्ती सत्ता परिवर्तन (Regime Change) की कोशिश कर रहा है, जो क्षेत्र में “अकल्पनीय मौत और विनाश” का कारण बनेगा।
अमेरिका में हाई अलर्ट और आतंकी खतरा : विरोध प्रदर्शनों के बीच, FBI की आतंकवाद-रोधी और काउंटर-इंटेलिजेंस टीमों को देश भर में ‘एलिवेटेड अलर्ट’ (उच्च स्तर की सतर्कता) पर रखा गया है।होमलैंड सिक्योरिटी सचिव क्रिस्टी नोएम ने कहा कि वे संभावित खतरों को विफल करने के लिए संघीय भागीदारों के साथ सीधे समन्वय कर रहे हैं। डर है कि खामेनेई की मौत का बदला लेने के लिए ईरान के समर्थक या स्लीपर सेल अमेरिका के भीतर हमला कर सकते हैं।
ट्रंप का रुख अडिग : इतने विरोध के बावजूद, राष्ट्रपति ट्रंप ने पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं। उन्होंने ईरानी जनता से अपील की है कि उनके पास सत्ता संभालने का यह “पीढ़ियों में एकमात्र मौका” है। ट्रंप का मानना है कि इस सैन्य कार्रवाई ने कूटनीति के रास्ते आसान कर दिए हैं, क्योंकि अब ईरान कमजोर पड़ चुका है।
