
पटना। मानसून सत्र के अंतिम दिन विधान परिषद में एमएलसी महेश्वर सिंह ने पथ निर्माण मंत्री भड़के। एक सवाल के जवाब में जब संबंधित मंत्री जवाब दे रही थीं तो उससे महेश्वर सिंह संतुष्ट नहीं हुए। दरअसल शुक्रवार को बिहार विधान परिषद में इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलिटेक्निक में टीचरों की कमी का मुद्दा उठाया गया। महेश्वर सिंह ने इंजीनियरिंग कॉलेजों में खाली पड़े टीचर और नन टीचिंग स्टाफ को लेकर सरकार से सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि सीएजी की रिपोर्ट में भी यह तथ्य सामने आया है कि बिहार के 31 इंजीनियरिंग कॉलेज और 15 पॉलिटेक्निक संस्थानों में 90 फीसदी से ज्यादा शिक्षक और गैर शिक्षक पद खाली पड़े हैं।
इस पर मंत्री शीला कुमारी जवाब देने के लिए उठीं। उन्होंने सरकार का जवाब सदन में पढ़ कर सुनाया। लेकिन इससे महेश्वर सिंह संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने सभापति को संबोधित करते हुए कहा कि सर हमलोग अनपढ़ गंवार हैं? जवाब भेजी हैं और जवाब तो हमलोग मिल ही गया है। ये जो शिक्षक की कमी है, गुणवत्ता की कमी है, उस पर बात होनी चाहिए।
इस पर पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र ने उन्हें कुछ बताने की कोशिश की। इस पर महेश्वर सिंह हत्थे से उखड़ गए। उन्होंने कहा कि का जवाब दीजिएगा आप, नया-नया पथ निर्माण मंत्री बने हैं। आएं, नया-नया मियां बेसी (ज्यादा) प्याज खा रहे हैं। प्रथम बार आए और लगे उड़ान भरने। बैठे-बैठे क्यों बोलते हैं। हमको जवाब चाहिए। इस पर मंत्री अशोक चौधरी ने महेश्वर सिंह को समझाने की कोशिश की, इसके बाद महेश्वर सिंह थोड़े शांत हुए और कहा कि अशोक बाबू, हम आपसे कहते हैं कि ये बैठे-बैठे ठेका टेंडर लेकर बोलते हैं। ये टेंडर लेकर बोलते हैं, जब मंत्री हैं ही तो हमको जवाब जाहिए।
