
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को बोडोलैंड समझौते को पूर्वोत्तर में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया और नक्सलियों से अपील की कि वे भी बम-बंदूक का रास्ता छोड़ विकास का मार्ग अपनाएं। उन्होंने कहा कि बोडो लोगों ने इसी विकास का रास्ता अपनाया और पिछले चार सालों में हमें बदलाव देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में हम पूर्वोत्तर के राज्यों के सीमा विवादों का सौहार्द्र के साथ समाधान खोज रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण इंदिरा गांधी खेल परिसर में प्रथम बोडोलैंड महोत्सव का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित भी किया। यह महोत्सव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2020 में बोडो शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद से सुधार और उबरने की महत्वपूर्ण उपलब्धि का जश्न मना रहा है।
इस शांति समझौते पर प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे न केवल बोडोलैंड में दशकों से चले आ रहे संघर्ष, हिंसा और जानमाल के नुकसान की समस्या से निजात मिली बल्कि यह समझौता अन्य शांति समझौतों के लिए प्रेरणास्रोत भी बना। शांति समझौते के कारण अकेले असम में 10 हजार से अधिक युवाओं ने हथियार और हिंसा छोड़ दी और वे मुख्यधारा में शामिल हो गये। किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि कार्बी आंगलोंग शांति समझौता, ब्रू-रियांग समझौता और एनएलएफटी त्रिपुरा समझौता हकीकत बन जाएगा।
विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने बोडोलैंड के लिए 1500 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज आवंटित किया है। इसके अतिरिक्त असम सरकार ने अपना विशेष विकास पैकेज लागू किया है। बोडोलैंड में शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कृति से संबंधित बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए 700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने बोडोलैंड महोत्सव को दशकों की हिंसा के बाद आया एक भावुक पल बताया। उन्होंने कहा कि वे पूर्वोत्तर में नया अध्याय लिखने के लिए बोडो लोगों का धन्यवाद देने आए हैं। उनके इस कथन के बाद कर्तल ध्वनि से स्टेडियम गूंज गया।
