रांची। पलामू प्रमंडलीय मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज अस्पताल से अब गंभीर स्थिति में रोगी रेफर नहीं किये जायेंगे। एमआरएमसीएच को स्पेशलिटी से सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बनाने की कवायद तेज कर दी गयी है। एक साल के भीतर यहां हृदय रोग (कार्डियोलॉजी), आंकलॉजी और न्यूरोलॉजी (स्नायूरोग) की सेवा प्रारंभ करने की तैयारी है। इसके बाद नेत्र रोग, रेडियोलॉजी आदि की भी सेवा प्रारंभ की जायेगी।

सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के बेहतर संचालन और उपरोक्त सेवाओं को प्रारंभ किए जाने के निमित परामर्श एवं संभावनाओं के मद्देनजर स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा तथा परिवार कल्याण विभाग को अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने गुरूवार को एक दर्जन स्पेशलिस्ट डाक्टरों की टीम के साथ एमआरएमसीएच का निरीक्षण किया। मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल का विजिट किया गया एवं तमाम संभावनाओं की जांच की गई। आवश्यक संसाधनों, प्रक्रियाओं तथा प्रशिक्षण आदि की जांच की गयी।

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि एमआरएमसीएच का भवन निर्माण सहित अन्य कार्यों की काफी धीमी गति है। वर्ष 2018-19 से निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन अबतक अधूरा है। दिसंबर 2025 तक हर हाल में एमआरएमसीएच में तीन प्रमुख स्वास्थ्य सेवाओं हृदय रोग (कार्डियोलॉजी), आंकलॉजी एवं न्यूरोलॉजी (स्नायूरोग) को प्रारंभ करने की तैयारी है, ताकि रेफर करने की स्थिति अगले साल से नहीं बने।

उन्होंने कहा कि रेफर करने की स्थिति में पेसेंट को काफी दिक्कत होती है। कभी कभी अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में ही मरीज दम तोड़ देते हैं। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि संवेदक को अगस्त 2025 तक हर हाल में भवन निर्माण कार्य पूरा करके सौंपने का निर्देश दिया गया है। अगर सितंबर तक नहीं सौंपा जाता है तो प्रत्येक महीने दो प्रतिशत की पेनाल्टी लगायी जाएगी। सितम्बर में दो, अक्टूबर में चार, नवंबर में छह एवं दिसंबर में आठ प्रतिशत पेनाल्टी लगायी जायेगी। उन्होंने कहा कि अस्पताल विजिट करने का मूल मकसद रांची रिम्स पर निर्भरता खत्म करनी है और जहां-जहां मेडिकल कॉलेज बने हैं, वहां सुपर स्पेशलिटी सेवा प्रदान करनी हैं।

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