पटना। राजद के नेता सुनील सिंह की विधान परिषद से सदस्यता जा सकती है। आचार समिति ने उनकी सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा कर दी है। यह पूरा मामला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मिमिक्री से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि पिछले सत्र में सदन के अंदर राजद के एमएलसी सुनील सिंह और मोहम्मद कारी सोहैब ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मिमिक्री की थी। सत्ताधारी सदस्यों ने मुख्यमंत्री को अपमानित करने का आरोप लगाते हुए इसका विरोध किया था और इसे विधान परिषद की आचार समिति में ले गए थे।

आरोप लगाया गया था कि यह सदन की मर्यादा के खिलाफ है और इनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग रखी गयी थी। आचार समिति ने इस मामले में एमएलसी सुनील सिंह को दोषी पाया है। आचार समिति ने सिंह की सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा कर दी है। बताया जाता है कि सोहैब ने समिति के पास अपनी गलती मान ली थी।

सिंह से पत्रकारों ने सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि वे इस विषय पर अभी कुछ नहीं कहेंगे। एक व्यक्ति को हटाने के लिए सभी नियमों को ताक पर रख दिया गया। षड्यंत्रकारियों द्वारा एक महीने से इस पर मेहनत की जा रही थी। शुक्रवार को इस पर चर्चा करेंगे। अभी तो प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया है। इस पर बहस होगी। उसके बाद हम चर्चा करेंगे। सुनील सिंह ने नीतीश कुमार को बड़ा प्रतिशोधी बताया।

आरजेडी एमएलसी सुनील सिंह ने पिछले सेशन में सदन के अंदर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अंदाज कॉपी करते हुए मिमिक्री की थी। आरजेडी के एक और एमएलसी कारी सोहैब ने भी इसी तरह का बर्ताव किया था। आरजेडी के दोनों एमएलसी से जुड़ा ये मामला विधान परिषद की अचार समिति के पास भेजा गया था। जांच समिति के सामने कारी सोहैब ने अपनी गलती स्वीकार की थी लेकिन सुनील सिंह ने गलती नहीं मानी थी। इसका नतीजा है कि अब उनकी सदस्यता पर बन आई है।

इस संबंध में राजद के नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से पूछा गया तब उन्होंने कहा कि यह तानाशाही है। आखिर किस आधार पर यह किया जा रहा है। किसी की सदस्यता आप ऐसे ही खत्म कर दोगे। लेकिन, आप देखिए जिनकी भी सदस्यता समाप्त की गई है, जनता का क्या जवाब रहा है।

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