
काठमांडू । नेपाल-चीन के सीमावर्ती इलाकों में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। 159 लोगों की मौत हो गई और हजारों तीर्थयात्री भी लापता हो गए हैं, जिनमें से 100 से अधिक भारतीय हैं। सबसे ज्यादा तबाही भोटेकोशी नदी के किनारे बसे इलाकों में हुई है। उत्तरी रसुवा में बॉर्डर आउटपोस्ट पर तैनात नेपाल आर्म्ड पुलिस फोर्स (एपीएफ) के चार जवान अचानक आई बाढ़ के बाद लापता बताए जा रहे हैं। वहीं, भारत ने भी कई टुकड़ियों को हाई अलर्ट पर रखा है और सीमा पर नदियों के जल स्तर की निगरानी की जा रही है।
भारत ने राहत सामग्री की पहली खेप भेजी : भारत ने बुधवार रात सैन्य परिवहन विमान के जरिये नेपाल को राहत सामग्री की पहली खेप भेजी। नेपाल में तिब्बत से लगी सीमा के पास अचानक आई बाढ़ में कम से कम 159 लोगों की मौत हो गई है और बड़े पैमाने पर तबाही मची है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेपाल के अपने समकक्ष बालेंद्र शाह से बातचीत करने के कुछ घंटे बाद राहत सामग्री भेजी गई। मोदी ने शाह को स्थिति से निपटने के लिए हरसंभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। मोदी ने बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर कहा, इस कठिन समय में भारत के लोग नेपाल के अपने बहन-भाइयों के साथ एकजुटता से खड़े हैं।
बिहार में अलर्ट, गंडक बैराज के सभी 36 फाटक खोले गए : बिहार सरकार ने पड़ोसी देश नेपाल के कई जिलों में बुधवार को अचानक आई बाढ़ के बाद गंडक नदी में जलप्रवाह बढ़ने की आशंका को देखते हुए पूरे तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा है। स्थिति से निपटने के लिए वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि बुधवार दोपहर तक वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से करीब 86 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था और जलप्रवाह लगातार बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि एहतियाती कदम के तौर पर बैराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं तथा अधीक्षण अभियंता के नेतृत्व में तकनीकी टीम तैनात की गई है। गंडक नदी के बेसिन में आने वाले सभी जिलों को भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, सभी फाटक खोलने से पानी का प्रवाह सुचारु रहेगा और बाढ़ की स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, बाढ़ प्रभावित इलाकों से 95 शव बरामद किए गए हैं। हालांकि, मृतकों की पहचान अभी पूरी नहीं हो पाई है। बाढ़ में 85 सुरक्षाकर्मी भी लापता हैं, जिनमें नेपाली सेना के 44, नेपाल पुलिस के 28 और आर्म्ड पुलिस फोर्स के 13 जवान शामिल हैं। प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव दल तैनात किए गए हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े 60 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसी तरह, 391 विदेशी और 93 घरेलू पर्यटकों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। बाढ़ से 19 मोटर-योग्य पुलों और 40 किलोमीटर लंबी सड़क को नुकसान पहुंचा है।
