पटना। चर्चा थी कि दही-चूड़ा भोज के बाद बिहार की सियासत बदल जाएगी। कुछ इधर आएंगे तो कुछ उधर जाएंगे। चुड़ा दही भोज तो गुजर गया, पर कहीं कोई बदलाव की आहट नहीं मिली। अलबत्ता लालू यादव के जिस घराने में नीतीश का बेसब्री से इंतजार था, उसे भी निराशा हाथ लगी। लालू यादव का नीतीश के लिए दरवाजा खोले रखने का भी कोई असर नहीं हुआ। अपने को नीतीश की भतीजी बता कर लालू की बेटियों मीसा भारती और रोहिणी आचार्य की उम्मीदों पर भी चाचा ने पानी फेर दिया।

लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव अब नीतीश कुमार के मुद्दे पर फिर मुखर हो गए हैं। पहले भी वे इसी अंदाज में दिखे थे। 2017 में जब नीतीश कुमार भाजपा के साथ चले गए तो तेज प्रताप ने उनके लिए आरजेडी में नो एंट्री का बोर्ड लगा रखा था। फिर वे उसी अंदाज में लालू के लिए राबड़ी आवास का दरवाजा बंद होने की बात कह रहे हैं। ऐसा वे अब कह रहे हैं, लेकिन लालू ने जब नीतीश के लिए दरवाजा खुला रखने का आफर दिया था तो वे खामोश थे। उनकी दोनों बहनें भी अलग-अलग ढंग से अपने पिता लालू की पेशकश का समर्थन कर रही थीं

लालू यादव के परिवार में शुरू से तेजस्वी यादव का अलग स्टैंड रहा है। लालू के आफर के उलट तेजस्वी का नीतीश कुमार को साथ लेने के मुद्दे पर अपने ही पैर में कुल्हाड़ी मारने वाली बात तेजस्वी ने कही। वे तो यह भी कहते रहे हैं कि नीतीश अब टायर्ड और रिटायर्ड हैं। यानी उनके आने न आने से उन्हें कोई फर्क नहीं दिखता। लालू के सियासी परिवार में अकेले तेजस्वी ने ही नीतीश को लेकर अन्यमनस्कता दिखाई है।

लालू यादव के परिवार में नीतीश को लेकर हां-ना की इस पहेली को लोग समझ नहीं पा रहे। आरजेडी समर्थकों में भी इसे लेकर दुविधा की स्थिति है। लालू की राय से वे सहमत नहीं दिखते। उन्हें यह अटपटा लगता है कि अभी तक वे जिनके खिलाफ आग उगलते रहे, उनके समर्थन में कैसे जयकारे लगाएंगे। खैर, लालू के परिवार में मचे इस घमासान को कुछ लोग सियासी पैंतरा मान रहे हैं। ऐसे लोगों का मानना है कि कुछ तो बात है, जो लालू की जुबान से निकल गई और खेल बिगाड़ने के भय से तेजस्वी और तेज प्रताप ने अलग राग अलापना शुरू कर दिया है।

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